खाद्य तेलों के महंगा होने की आशंका शैंपू, साबून, बिस्किट, नमकीन, भी होंगे महंगे

प्रौद्योगिकी-कारोबारी

सरकार की कोशिशों के बाद हाल के दिनों में खाद्य तेल में आई गिरावट का रुख थमने के साथ उसमें तेजी आने की आशंका है। दुनिया के सबसे बड़े पॉम तेल उत्पादक इंडोनेशिया मे घरेलू मांग पूरा करने के लिए निर्यात घटाने का फैसला किया है।

भारत इंडोनशिया से सालाना 80 लाख टन पॉम तेल खरीदता है जो इसकी कुल खपत का करीब 40 फीसदी है। ऐसे मे इंडोनेशिया के फैसले से विशेषज्ञ भारत में पॉम के साथ अन्य खाद्य तेल की कीमतों में दाम में 10 फीसदी तक वृद्धि की आशंका जता रहे हैं।

खाद्य तेलों में तेजी से अन्य खाद्य पदार्थों में भी इजाफा हो सकता है। उल्लेखनीय है कि इंडोनेशिया में खाने के तेल के दाम चढ़े है। रमजान, ईद उल फितर से पहले कीमतों में तेजी आई है। इंडोनेशिया कीमतें कम करने के लिए कंपनियों को घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के आदेश दिए है। इंडोनेशिया ने कंपनियों को अप्रैल तक पाम ऑयल की आपूर्ति 4.50 लाख टन प्रति महीने करने का आदेश दिया है, जबकि पिछले महीने घरेलू आपूर्ति तीन लाख टन प्रति महीने की थी। इंडोनेशिया ने पिछले साल भी पाम ऑयल के निर्यात पर तीन महीनों के लिए प्रतिबंध लगाया था।

भारत में पाम तेल का ज्यादातर इस्तेमाल डिब्बाबंद खाद्य और उपभोक्ता सामान बनाने वाले उद्योग होता है। बिस्किट, कुकीज, नमकीन और इंस्टेंट नूडल्स जैसे खाद्य पदार्थों के अलावा शैंपू, साबून और लिपस्टिक जैसे सौंदर्य प्रसाधनों में भी होता है। इसके अलावा ब्रेड का पैकेट बनाने में भी इसका उपयोग होता है।

इंडोनेशिया के निर्यात नियम पर नजर डालें तो कंपनियों को डोमेस्टिक मार्केट ऑब्लिगेशन (डीएमओ ) के तहत निर्यात का लाइसेंस मिला हुआ है। इसके तहत कंपनियां घरेलू आपूर्ति का छह गुना निर्यात कर सकती हैं। लेकिन इंडोनेशिया ने अगले आदेश तक इसे घटाकर एक तिहाई कर दिया है। ऐसे में कंपनियों को निर्यात की बजाय ज्यादातर तेल घरेलू बाजार में बेचना होगा। इंडोनेशिया हर साल करीब 480 लाख टन पाम तेल का उत्पादन करता है। यह कुल वैश्विक उत्पादन 750 लाख टन के आधे से भी ज्यादा है।