जया किशोरी को आइडल मानती है यह 17 साल की कथावाचिका, जानिए आखिर कौन है

देश-विदेश

कथावाचन के क्षेत्र में जया किशोरी एक बड़ा नाम हैं। उन्हीं की तरह MP कि एक 17 साल की युवती पलक किशोरी ने भी कथावाचन शुरु कर दिया है। बता दें कि पलक किशोरी ने भागवत की पढ़ाई नहीं की है, इसके बावजूद वो कथावाचन करती हैं। महज 17 साल की उम्र और 12वीं की छात्रा पलक किशोरी दो भागवत कथाएं और 3 श्रीकृष्ण प्रवचन कर चुकी हैं। बता दें कि उनकी कथा सुनने के लिए हजारों लोगों की भीड़ आती है। उनके संगीतमय कथावाचन के लोग दीवाने हैं। कथावाचिका पलक किशोरी खुद को कृष्ण भगवान का भक्त मानती हैं। वह कहती हैं कि वह लोगों को कृष्ण भगवान के बारे में ज्यादा से ज्यादा बता सकें। इस दौरान उन्होंने एक कथन याद दिलाते हुए कहा कि भगवान कृ्ष्ण कहते हैं यह मत देखो कि दुनिया ने आपको क्या दिया बल्कि यह देखो कि दुनिया को आप क्या दे रहे हो।

पलक किशोरी मध्य प्रदेश के सतना जिले की रहने वाली हैं। सतना शहर के मुख्तियारगंज, महाराणा प्रतापनगर की रहने वाली हैं। वह 12वीं कक्षा की छात्रा हैं। पलक किशोरी के पिता का नाम संतोष मिश्रा है। माता का नाम अराधना मिश्रा है। वह अब तक दो भागवत कथाएं और 3 कृष्ण प्रवचन कर चुकी हैं। पलक किशोरी मशहूर कथावाचक जया किशोरी को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं। पलक किशोरी ने बताया कि जिस तरह जया किशोरी जी भागवत कथा करती हैं और उनके सुविचार आते हैं, उनके वीडियोज देखकर मैं प्रेरित हुई और अब उनके मार्गदर्शन में कथावाचन भी कर रही हैं। पलक किशोरी ने बताया कि उनके भक्तगण उन्हें जया किशोरी कहकर बुलाते हैं। उन्होंने बताया कि अब वो जया किशोरी की तरह ही कथा करने लगी हैं। पलक किशोरी ने बताया कि वह मशहूर कथावाचक जया किशोरी को अपना आदर्श भी मानती हैं और उनके वीडियोज देखकर सीखती हैं। उन्होंने बताया कि उनकी शैली जया किशोरी से मिलती-जुलती है इसलिए सोशल मीडिया पर लोग उन्हें जया किशोरी के नाम से ही बुलाते हैं।

पलक किशोरी ने बताया कि उन्होंने पहली बार 2021 में नवरात्रि के पर्व पर कथावाचन किया था। नवरात्रि पर उन्होंने लगभग दो घंटे तक कृष्ण प्रवचन किया था। पलक ने बताया कि वह बचपन से ही कृष्ण भगवान की भक्त हैं और जया किशोरी की वीडियोज देख-देखकर उनसे सीखती रही और आगे बढ़ती रही। पलक ने बताया कि उन्होंने भागवत के लिए कोई प्रोफेशनल पढ़ाई नहीं की है। उन्होंने कहा लॉकडाउन के दौरान जब लोग घरों में रहते थे तभी वह भी घर में रहकर ही भागवत कथा का अध्ययन करती थीं। उन्होंने बताया कि अध्ययन करते-करते वह कथावाचन करने लगीं।