माघ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
माघ पूर्णिमा का दिन हिंदू कैलेंडर में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा स्नान, दान और जप करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। देशभर के गंगा घाट और मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा रही है।
भव्य आरती और पूजा विधि
श्रद्धालु प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर मंदिर में जाते हैं। भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्वलित कर तुलसी पत्र अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद भव्य आरती की जाती है। कहा जाता है कि आज की आरती से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
स्थानीय भाव और आयोजनों का दृश्य
गंगा घाट, काशी विश्वनाथ और अन्य प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालु दीपक और फूलों से सजावट करते हुए दिख रहे हैं। वातावरण में भक्ति भाव है और मंदिर प्रांगण में मंत्रों और आरती की ध्वनि गुंज रही है। इस अवसर पर कई धार्मिक आयोजन और प्रवचन भी आयोजित किए जा रहे हैं।
भक्ति संदेश और मार्गदर्शन
“माघ पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और सही नियम से आरती करने से जीवन में सुख और शांति आती है। यह दिन दान और साधु सेवा के लिए भी विशेष शुभ माना गया है।”
— पंडित राजेश शर्मा, धर्माचार्य, नई दिल्ली
आम जनता पर प्रभाव
आज के दिन लोग मंदिर और गंगा घाटों में जाकर स्नान, पूजा और आरती कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने भी व्यवस्था सुदृढ़ कर दी है ताकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुरक्षित रूप से भाग ले सकें।


