नई दिल्ली।’ लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विदेशी नीति और डेटा सुरक्षा के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा। राहुल गांधी ने हाल ही में अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील (Trade Deal) पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने देश के हितों के साथ समझौता किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका और चीन जैसे देशों की नजर अब भारत के विशाल डेटा पर है।
डेटा ही नया ‘पेट्रोल’ है
राहुल गांधी ने सदन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिक्र करते हुए कहा, “आज के युग में डेटा ही वह पेट्रोल है जिससे भविष्य की अर्थव्यवस्था चलेगी। अगर अमेरिका को अपनी सुपरपावर की स्थिति बरकरार रखनी है और डॉलर का दबदबा बनाए रखना है, तो उसकी एकमात्र चाबी भारतीय डेटा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना सोचे-समझे इस अनमोल संसाधन को विदेशी ताकतों के हाथों में सौंप रही है।
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“ट्रम्प से बराबरी की बात करते”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ संबंधों और व्यापारिक समझौतों पर कटाक्ष करते हुए राहुल ने कहा:
“अगर आज केंद्र में हमारी (INDIA गठबंधन की) सरकार होती, तो हम राष्ट्रपति ट्रम्प से साफ कहते—हम आपके नौकर नहीं हैं। हम बराबरी के स्तर पर बात करेंगे। अगर आपको भारत के डेटा तक पहुंच चाहिए, तो आपको हमें बराबर का सम्मान और अधिकार देना होगा।”
प्रमुख आरोप और चिंताएं:
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रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy): राहुल ने कहा कि अब भारत की ऊर्जा और आर्थिक नीतियां वॉशिंगटन से तय हो रही हैं।
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किसानों का हित: उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील में भारतीय किसानों के ‘खून-पसीने’ को अमेरिकी हितों के लिए बेच दिया गया है।
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दबाव में समझौता: राहुल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारी अंतरराष्ट्रीय दबाव में हैं, जिसके कारण उन्होंने आनन-फानन में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
सत्ता पक्ष का पलटवार
राहुल गांधी के भाषण के दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। भाजपा नेताओं ने राहुल के बयानों को ‘तथ्यहीन’ और देश की छवि खराब करने वाला बताया।


