यरूशलेम/बेरूत: मध्य-पूर्व में तनाव के बीच एक तरफ जहां अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच तीन सप्ताह के सीजफायर (युद्धविराम) का ऐलान किया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे शांति बहाली के प्रयासों पर गंभीर संकट के बादल छा गए हैं।
घोषणा के बाद भी जारी हिंसा
इजरायल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष को रोकने के लिए गुरुवार (23 अप्रैल) को व्हाइट हाउस में हुई उच्च-स्तरीय वार्ता के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने तीन सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की थी। हालांकि, शांति की यह उम्मीद चंद घंटों में ही चकनाचूर हो गई। सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार, लेबनान की ओर से उत्तरी इजरायल के ‘शतुला’ इलाके को निशाना बनाकर रॉकेट दागे गए। जवाबी कार्रवाई में इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों को हवाई हमलों और गोलाबारी के जरिए निशाना बनाया।
हिजबुल्लाह ने करार दिया ‘बेमानी’
इस संघर्ष में नया मोड़ तब आया जब हिजबुल्लाह के एक वरिष्ठ सांसद ने खुले तौर पर कहा कि इजरायल द्वारा जारी ‘शत्रुतापूर्ण कृत्यों’ के बीच यह युद्धविराम पूरी तरह से ‘बेमानी’ (अर्थहीन) है। समूह ने साफ कर दिया है कि वह इजरायली हमलों के खिलाफ अपनी रक्षा और जवाबी कार्रवाई जारी रखने का पूरा अधिकार रखता है।
अमेरिका की कूटनीतिक चुनौती
एक तरफ राष्ट्रपति ट्रंप का प्रशासन इस समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देख रहा है, वहीं दूसरी ओर बढ़ते हमलों ने अमेरिका की भूमिका को भी मुश्किल में डाल दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका लेबनान को हिजबुल्लाह से अपनी सुरक्षा करने में मदद करेगा, लेकिन जमीनी स्तर पर हो रहे हमलों ने स्थिति को अनिश्चित बना दिया है।


