विकास के मंच से सियासी वार
प्रधानमंत्री ने एक्सप्रेसवे को “विकसित भारत” की रफ्तार बताया। फिर अचानक सुर बदला। उन्होंने पर निशाना साधा। भीड़ में बैठे लोग हर लाइन पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। तालियां। नारे। माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में दिखा। उन्होंने पश्चिम बंगाल का जिक्र किया और कहा कि आने वाले चुनाव परिणाम देश के विकास संकल्प को और मजबूती देंगे। यह बयान सीधे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या है गंगा एक्सप्रेसवे की ताकत?
यह सिर्फ सड़क नहीं है। यह एक लंबी आर्थिक लाइन है जो कई जिलों को जोड़ती है।
- लागत: ₹36,000 करोड़+
- उद्देश्य: कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स सुधार
- प्रभाव: व्यापार, रोजगार और ट्रैवल टाइम में कमी
स्थानीय लोगों की नजर में यह परियोजना बड़ा बदलाव ला सकती है। सड़क बनती है, फिर उसके आसपास शहर बढ़ते हैं। यही पैटर्न यहां भी दिख सकता है।


