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नारद जयंती का दिन, भक्ति और ज्ञान का संगम
नारद मुनि—देवताओं के दूत, संगीत के ज्ञाता, और भक्ति के प्रतीक। आज उनके जन्म दिवस पर विशेष पूजा की जाती है। घरों में भजन। मंदिरों में कीर्तन। माहौल अलग ही होता है। कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं। कुछ लोग कथा सुनते हैं। और कुछ बस शांत बैठकर “नारायण-नारायण” का जाप करते हैं।
आज के प्रमुख पंचांग तत्व
दिन की शुरुआत से ही ग्रहों की चाल असर दिखाती है। पंचांग के अनुसार:
- तिथि: कृष्ण पक्ष प्रतिपदा
- वार: शनिवार
- नक्षत्र: विशाखा (आंशिक अवधि तक प्रभाव)
- योग: शुभ संयोग, धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल
विशाखा नक्षत्र को वृद्धि और लक्ष्य प्राप्ति से जोड़ा जाता है। जो काम अटक रहा है, उसे आज शुरू करने का सोच सकते हैं।
राहुकाल और शुभ मुहूर्त
दिन अच्छा है, लेकिन समय का ध्यान जरूरी। राहुकाल में कोई नया काम शुरू करने से बचते हैं।
- राहुकाल: सुबह लगभग 09:00 बजे से 10:30 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर करीब 11:50 बजे से 12:40 बजे तक
- शुभ समय: सुबह और दोपहर के मध्य का समय अनुकूल
एक छोटा सा नियम—काम वही करें, जब मन और समय दोनों साथ हों।
मानव पक्ष: मंदिरों में दिखी अलग ऊर्जा
सुबह की ठंडी हवा। मंदिर के बाहर फूलों की खुशबू। अंदर दीपक की लौ स्थिर। एक बुजुर्ग धीरे-धीरे मंत्र पढ़ रहे थे। पास में एक बच्चा अपने पिता का हाथ पकड़कर घंटी बजा रहा था। यही है इस दिन की असली तस्वीर। आस्था, परंपरा और सादगी।


