Vat Savitri Fast 2026 : नई दिल्ली। हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ संकल्प से अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
इस बार वट सावित्री व्रत शनिवार के दिन पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार और बरगद के पेड़ का विशेष संबंध माना जाता है। ऐसे में इस दिन पति-पत्नी यदि मिलकर पूजा करें तो वैवाहिक जीवन में प्रेम, सुख और समृद्धि बनी रहती है।
PM Modi’ केंद्र का बड़ा कदम’ ‘वंदे मातरम’ के अपमान पर जेल का प्रावधान, कैबिनेट की मंजूरी
वट सावित्री व्रत 2026 का महत्व
वट सावित्री व्रत को अखंड सौभाग्य का व्रत कहा जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला या फलाहार व्रत रखकर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। बरगद के वृक्ष को त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है। इसकी पूजा करने से परिवार में सुख-शांति और दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहती है।
इस तरह करें बरगद की पूजा
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
- पूजा की थाली में रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप, जल, फल और कच्चा सूत रखें।
- बरगद के पेड़ के पास जाकर जल अर्पित करें।
- पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करें।
- वट सावित्री व्रत कथा का पाठ करें और माता सावित्री व सत्यवान का स्मरण करें।
- पति-पत्नी मिलकर पूजा करें और एक-दूसरे के सुखद जीवन की कामना करें।
पति-पत्नी साथ करें पूजा
धार्मिक मान्यता है कि यदि इस दिन पति-पत्नी एक साथ पूजा करते हैं तो रिश्ते में विश्वास और प्रेम बढ़ता है। इससे वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
क्या करें और क्या न करें
करें
- बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
- जरूरतमंदों को दान करें।
- पूजा में श्रद्धा और संयम बनाए रखें।
न करें
- किसी का अपमान न करें।
- झूठ और क्रोध से बचें।
- पूजा के दौरान नकारात्मक विचार न रखें।


