दिल्ली की बल्लेबाजी बनी सबसे बड़ी टेंशन
दिल्ली ने इस सीजन कई मुकाबलों में अच्छी शुरुआत की, लेकिन मिडिल ऑर्डर बार-बार दबाव में टूटता दिखा। टीम का टॉप ऑर्डर रन बनाता है, फिर अचानक विकेट गिरने लगते हैं। पिछला मुकाबला इसका ताजा उदाहरण रहा। ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों के चेहरे साफ बता रहे थे कि टीम अंदर से दबाव महसूस कर रही है।
अरुण जेटली स्टेडियम की छोटी बाउंड्री बल्लेबाजों को मौका देती है, लेकिन यही मैदान गेंदबाजों की परीक्षा भी लेता है। रात की उमस और तेज आउटफील्ड मैच को हाई-स्कोरिंग बना सकती है। दर्शकों की आवाज इतनी तेज होती है कि कई बार कप्तान की फील्ड सेटिंग तक सुनाई नहीं देती। दिल्ली को सबसे ज्यादा उम्मीद अपने भारतीय बल्लेबाजों से रहेगी। अगर शुरुआती छह ओवर में टीम 60+ रन निकाल लेती है, तो मुकाबले की दिशा बदल सकती है।
कोलकाता की नजर सीधा वार करने पर
कोलकाता नाइट राइडर्स इस मैच में ज्यादा संतुलित नजर आ रही है। टीम के पास विस्फोटक बल्लेबाज हैं और स्पिन विभाग भी मजबूत दिखा है। खासकर मिडिल ओवरों में KKR विपक्षी टीम को जकड़ लेती है। कप्तान की रणनीति साफ है — दिल्ली के टॉप ऑर्डर पर शुरुआती हमला। एक दिलचस्प बात यह है कि कोलकाता ने इस सीजन दबाव वाले मैचों में बेहतर क्रिकेट खेला है। टीम के युवा खिलाड़ियों ने बड़े मौकों पर जिम्मेदारी उठाई। पिछले मैच में डगआउट का माहौल बिल्कुल अलग था। खिलाड़ी हंसते दिखे, लेकिन मैदान पर उतरते ही आक्रामक क्रिकेट खेला।


