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Chhattisgarh High Court : पिछड़ा वर्ग आयोग सिर्फ सलाहकार संस्था, कमर्शियल विवाद में रिकवरी का अधिकार नहीं

Hum Vatan News
Last updated: July 2, 2026 12:01 PM
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बिलासपुर: Chhattisgarh High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (Chhattisgarh State Backward Classes Commission) एक सलाहकार और सिफारिश करने वाली संस्था है। आयोग को किसी कमर्शियल विवाद में सीधे तौर पर धनराशि की रिकवरी का आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आयोग अपनी वैधानिक सीमाओं से बाहर जाकर किसी पक्ष से पैसे वसूलने या भुगतान कराने का निर्देश नहीं दे सकता।

Chhattisgarh High Court stay on recovery order of Backward Classes Commission
Chhattisgarh High Court stay on recovery order of Backward Classes Commission

यह फैसला जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने सुनाया, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा 23 सितंबर 2022 को जारी रिकवरी आदेश को निरस्त कर दिया गया।

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क्या था पूरा मामला?

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मामला कमला मोटर्स द्वारा एक हार्वेस्टर मशीन की बिक्री से जुड़ा था। रिकॉर्ड के अनुसार, हार्वेस्टर की कीमत करीब 21 लाख रुपये तय हुई थी और खरीदार ने 30 हजार रुपये एडवांस के रूप में जमा किए थे।

हालांकि, तय समय के भीतर बैंक फाइनेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी। इसी दौरान कोविड-19 महामारी के कारण मशीन की डिलीवरी में भी देरी हुई। बाद में जब खरीदार को बैंक से फाइनेंस मिल गया, तब विक्रेता ने हार्वेस्टर की डिलीवरी देने की पेशकश की, लेकिन खरीदार ने सौदा रद्द कर दिया।

इसके बाद खरीदार ने मामले की शिकायत विभिन्न अधिकारियों और छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के समक्ष दर्ज कराई।

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आयोग ने दिया था रिकवरी का आदेश

शिकायत पर सुनवाई करते हुए आयोग ने संबंधित कलेक्टर को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता कमला मोटर्स से 1,26,500 रुपये की वसूली करें और यह राशि खरीदार को दिलाई जाए।

कमला मोटर्स ने इस आदेश को Chhattisgarh High Court में चुनौती देते हुए कहा कि आयोग को इस प्रकार का रिकवरी आदेश देने का कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने “छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम, 1995” की धारा-9 का विस्तार से अध्ययन किया। अदालत ने कहा कि अधिनियम के तहत आयोग का कार्य मुख्य रूप से शिकायतों की जांच करना, सरकार को सुझाव देना और सिफारिश करना है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयोग की सिफारिशें कई मामलों में राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण और बाध्यकारी हो सकती हैं, लेकिन इससे आयोग को न्यायिक या कार्यपालक शक्तियां नहीं मिल जातीं।

अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति से धनराशि की वसूली कर दूसरे पक्ष को भुगतान कराने का अधिकार केवल सक्षम न्यायिक अथवा वैधानिक प्राधिकारी के पास होता है, न कि आयोग के पास।

आयोग सिविल कोर्ट नहीं बन जाता

Chhattisgarh High Court ने अपने फैसले में पूर्व के कई न्यायिक निर्णयों का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी आयोग को जांच या पूछताछ के लिए सिविल कोर्ट जैसी कुछ सीमित शक्तियां प्रदान की गई हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह पूर्ण रूप से सिविल कोर्ट बन जाता है।

अदालत ने कहा कि आयोग केवल तथ्यों की जांच कर सकता है और अपनी रिपोर्ट या सिफारिश सरकार को दे सकता है, लेकिन वह स्वयं किसी कमर्शियल विवाद का अंतिम फैसला सुनाकर धनराशि की रिकवरी का आदेश जारी नहीं कर सकता।

कमर्शियल विवाद में अधिकार क्षेत्र से बाहर गया आयोग

कोर्ट ने माना कि यह पूरा विवाद एक हार्वेस्टर मशीन की बिक्री से जुड़े कमर्शियल लेन-देन का था। ऐसे मामलों में अनुबंध, भुगतान और रिकवरी से जुड़े विवादों का निपटारा सक्षम न्यायालय या संबंधित वैधानिक मंच पर किया जाना चाहिए।

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हाईकोर्ट ने कहा कि आयोग द्वारा 1,26,500 रुपये की रिकवरी कर खरीदार को भुगतान करने का निर्देश देना उसकी वैधानिक शक्तियों के दायरे से बाहर था। इसे केवल एक सिफारिश नहीं माना जा सकता, बल्कि यह एक बाध्यकारी आदेश था, जिसे जारी करने का अधिकार आयोग के पास नहीं था।

आदेश किया गया निरस्त

इन सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए Chhattisgarh High Court ने 23 सितंबर 2022 को छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा जारी रिकवरी आदेश को निरस्त कर दिया।

फैसले का महत्व

यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग सहित अन्य सलाहकार आयोग अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आर्थिक विवादों में रिकवरी या भुगतान संबंधी बाध्यकारी आदेश जारी नहीं कर सकते। अदालत ने साफ किया कि आयोग की भूमिका सलाह और सिफारिश तक सीमित है, जबकि कमर्शियल विवादों का अंतिम निपटारा केवल सक्षम न्यायालय या वैधानिक प्राधिकरण ही कर सकता है।

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