CG NEWS : दुर्ग। गणित का नाम सुनते ही कई विद्यार्थियों के मन में कठिन विषय की छवि बन जाती है। सूत्र और नियम याद करने के दबाव में बच्चे अक्सर गणित को समझने के बजाय रटने लगते हैं। इसी समस्या को दूर करने के उद्देश्य से दुर्ग जिले के चार बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों में मैथ्स पार्क बनाने की पहल की जा रही है। इसके लिए जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा की ओर से 17 अगस्त को आयुक्त, राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा, रायपुर को प्रस्ताव भेजा गया है।
रटने के बजाय समझकर सीखेंगे गणित
मैथ्स पार्क का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को गणित के सिद्धांतों को व्यावहारिक तरीके से समझाना है। यहां बच्चे केवल किताबों में दिए सूत्र याद नहीं करेंगे, बल्कि अलग-अलग गणितीय अवधारणाओं को देखकर, छूकर और गतिविधियों के माध्यम से समझ सकेंगे। इससे गणित को लेकर विद्यार्थियों के मन में बनी झिझक और डर को कम करने में मदद मिलेगी।
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चार स्कूलों का किया गया चयन
जिले में बोर्ड परीक्षाओं में बेहतर परिणाम देने वाले चार विद्यालयों का चयन मैथ्स पार्क के निर्माण के लिए किया गया है। संबंधित प्रस्ताव राज्य परियोजना कार्यालय को भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलने के बाद चयनित स्कूलों में गणित से संबंधित गतिविधियों और शिक्षण संसाधनों को विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया जा सकेगा।
खेल-खेल में समझेंगे गणित के नियम
मैथ्स पार्क में विद्यार्थियों को गणित सिखाने के लिए अलग-अलग मॉडल, उपकरण और गतिविधियां विकसित की जा सकती हैं। ज्यामिति, मापन, आकृतियों, संख्या पद्धति और अन्य गणितीय अवधारणाओं को वास्तविक उदाहरणों के जरिए समझाने पर जोर रहेगा। इससे विद्यार्थियों को यह समझने में आसानी होगी कि गणित केवल किताबों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी इसका उपयोग होता है।
बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर
गणित में कमजोर विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती विषय को लेकर आत्मविश्वास की कमी होती है। मैथ्स पार्क जैसी गतिविधि आधारित व्यवस्था से बच्चों को बिना दबाव के सीखने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थी सवालों को खुद हल करने, मॉडल के माध्यम से उत्तर खोजने और अपनी गलतियों से सीखने का प्रयास कर सकेंगे।
शिक्षकों को भी मिलेगा नया संसाधन
मैथ्स पार्क केवल विद्यार्थियों के लिए ही उपयोगी नहीं होगा, बल्कि शिक्षकों को भी गणित पढ़ाने के नए तरीके मिलेंगे। शिक्षक पारंपरिक ब्लैकबोर्ड आधारित शिक्षण के साथ गतिविधि आधारित तरीकों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे कक्षा में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।


