रायपुर: छत्तीसगढ़ के सबसे बहुचर्चित शराब घोटाले (Liquor Scam) मामले में जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री सचिवालय की उप सचिव सौम्या चौरसिया और आबकारी विभाग के अधिकारी के.के. श्रीवास्तव की रिहाई हो गई है। लंबे समय से सलाखों के पीछे रहने के बाद, अदालत ने दोनों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
500 दिन से अधिक समय बाद मिली राहत
सौम्या चौरसिया, जिन्हें पूर्ववर्ती सरकार में बेहद प्रभावशाली अधिकारी माना जाता था, लंबे समय से जेल में बंद थीं। शराब घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED/ACB) की कार्रवाई के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। के.के. श्रीवास्तव की रिहाई को भी इस मामले में एक बड़े कानूनी घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
इन शर्तों का करना होगा पालन
कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जमानत देते हुए कुछ सख्त शर्तें लागू की हैं, जिनका उल्लंघन करने पर उनकी जमानत रद्द की जा सकती है:
-
पासपोर्ट जमा: दोनों को अपना पासपोर्ट अदालत में सरेंडर करना होगा ताकि वे देश छोड़कर बाहर न जा सकें।
-
हर पेशी पर उपस्थिति: मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में होने वाली हर पेशी पर उन्हें अनिवार्य रूप से उपस्थित होना होगा।
-
जांच में सहयोग: आरोपियों को निर्देश दिया गया है कि वे जांच को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेंगे और एजेंसियों के बुलाने पर सहयोग करेंगे।
सियासी गलियारों में चर्चा तेज
प्रदेश के इस हाई-प्रोफाइल मामले में हुई रिहाई के बाद राजधानी रायपुर के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जहाँ एक ओर बचाव पक्ष इसे न्याय की जीत बता रहा है, वहीं दूसरी ओर शराब घोटाले की जांच कर रही एजेंसियां अब भी साक्ष्य जुटाने और अन्य कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई हैं।
क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ में हुए कथित 2,000 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में ईडी और अब राज्य की एसीबी-ईओडब्ल्यू लगातार जांच कर रही है। आरोप है कि शराब की बोतलों पर नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचाया गया और अवैध रूप से धन जुटाया गया। इस मामले में कई बड़े नेता, अधिकारी और शराब कारोबारी जेल की हवा खा चुके हैं।



