Bilaspur High Court , बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग में हेड मास्टर से लेक्चरर पद पर पदोन्नति से जुड़े विवादित मामलों में अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने 22 दिसंबर 2025 को आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की पूरी कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह आदेश याचिकाकर्ता बृजेश मिश्रा एवं अन्य द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया गया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बृजेश मिश्रा वर्ष 2010 से हेड मास्टर प्राथमिक के पद पर नियमित रूप से सेवाएं दे रहे हैं। उनके अनुसार 1 जनवरी 2022 को आयोजित डीपीसी में उन्हें लेक्चरर पद पर पदोन्नति के लिए पूर्णतः योग्य पाया गया था। बावजूद इसके, कुछ अन्य याचिकाओं के लंबित रहने के कारण उस समय पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया गया।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि विभाग द्वारा बाद में 22 दिसंबर 2025 को नई डीपीसी आयोजित कर पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, जबकि पहले से पात्र और चयनित अभ्यर्थियों के मामलों का निराकरण नहीं किया गया था। इससे न केवल वरिष्ठता नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि योग्य शिक्षकों के अधिकारों को भी प्रभावित किया गया।
हाईकोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में याचिकाकर्ताओं के तर्कों को गंभीर मानते हुए डीपीसी की कार्रवाई पर रोक लगा दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की विस्तृत सुनवाई कर अंतिम निर्णय नहीं दिया जाता, तब तक 22 दिसंबर 2025 की डीपीसी के आधार पर कोई पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा।
इस आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया पर अस्थायी विराम लग गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वे कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे और आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशानुसार की जाएगी। वहीं, शिक्षक संगठनों ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि यह आदेश लंबे समय से लंबित पदोन्नति मामलों में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


