केंद्र-राज्य साझा योजनाओं में खर्च सबसे धीमा
कम बजट उपयोग वाली ये योजनाएं वे हैं, जिनमें केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर खर्च करती हैं। राज्यों से समय पर प्रस्ताव न आने, प्रशासनिक देरी और प्रक्रियात्मक अड़चनों के कारण राशि जमीन तक नहीं पहुंच पाई। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई राज्यों में फाइलें अब भी मंजूरी के स्तर पर अटकी हुई हैं, जबकि वित्तीय वर्ष तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है।
इन योजनाओं में सबसे कम बजट खर्च
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार योजना
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना
- अनुसूचित जाति छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना
- किसानों से जुड़ी एक प्रमुख केंद्र-राज्य साझा योजना, जिसमें खर्च सबसे कम दर्ज किया गया
जमीन पर असर साफ दिख रहा है
बजट खर्च में देरी का सीधा असर लाभार्थियों पर पड़ रहा है। कई जिलों में विधवाओं की पेंशन महीनों से लंबित है। छात्रवृत्ति न मिलने से सरकारी स्कूलों और छात्रावासों में पढ़ने वाले छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। एक राज्य के सामाजिक कल्याण अधिकारी ने कहा कि केंद्र से राशि जारी न होने के कारण जिला स्तर पर भुगतान रोका गया है। फील्ड स्टाफ रोज शिकायतें सुन रहा है।
सरकार का पक्ष
“कुछ योजनाओं में खर्च की गति धीमी है, लेकिन वित्त वर्ष के अंतिम तिमाही में इसमें तेजी लाई जाएगी। राज्यों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है।” — वरिष्ठ अधिकारी, वित्त मंत्रालय
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मार्च से पहले फंड रिलीज नहीं हुआ, तो कई योजनाओं का पैसा लैप्स होने का खतरा रहेगा। इसका सीधा असर गरीब, किसान, महिलाएं और छात्र वर्ग पर पड़ेगा। राज्यों को अब 15 दिनों के भीतर उपयोग प्रमाणपत्र भेजने के निर्देश दिए गए हैं। बजट खर्च की समीक्षा बैठकें साप्ताहिक आधार पर होंगी।


