CG News, कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के सरोना तहसील अंतर्गत ग्राम घोटियावाही में एक भावुक और चर्चा का विषय बना मामला सामने आया है। यहां एक ही परिवार के पांच सदस्यों ने ईसाई धर्म को छोड़कर पुनः अपने मूल सनातन (हिंदू) धर्म में घर वापसी की है। इस अवसर पर गांव में विशेष धार्मिक और सामाजिक आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ परिवार का स्वागत किया।
जानकारी के अनुसार, यह परिवार करीब तीन वर्ष पहले कथित तौर पर लालच और बहकावे में आकर ईसाई धर्म से जुड़ा था। समय बीतने के साथ परिवार के सदस्यों को अपने पूर्वजों की आस्था, संस्कार और परंपराओं की याद आने लगी। इसके बाद उन्होंने आपसी चर्चा और गांव के वरिष्ठ लोगों से संवाद कर अपने मूल धर्म में लौटने का निर्णय लिया।
घर वापसी के दिन गांव में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। ग्रामीणों ने परिवार के सदस्यों के पैर धोकर सम्मान किया और गंगा जल छिड़ककर शुद्धिकरण की रस्म निभाई। इस दौरान मंत्रोच्चार, पूजा और पारंपरिक स्वागत ने माहौल को भावनात्मक बना दिया। कई ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं, तो वहीं परिवार के सदस्यों ने भी अपने निर्णय को आत्मिक शांति देने वाला बताया।
परिवार के एक सदस्य ने कहा कि उन्हें अब अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म उनके पूर्वजों की पहचान है और उसी में उन्हें आत्मिक संतोष मिलता है। उन्होंने गांव के लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि जिस तरह से उन्हें अपनाया गया, उससे उनका मन और भी मजबूत हुआ है।
गांव के बुजुर्गों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की घर वापसी सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसकी आस्था चुनने का अधिकार है, लेकिन जब कोई अपने मूल संस्कारों की ओर लौटता है, तो समाज को उसे सम्मान देना चाहिए।


