- बड़ी गिरावट: प्रदेश के 33 में से 30 जिलों में पिछले सीजन के मुकाबले धान खरीदी कम हुई।
- अजीब संयोग: जिन जिलों में उत्पादन कम था, वहां खरीदी का आंकड़ा उम्मीद से कहीं ज्यादा निकला।
- जांच का दायरा: असामान्य आंकड़ों के बाद समितियों और टोकन वितरण पर सवालिया निशान।
CG Paddy Procurement Report , रायपुर — छत्तीसगढ़ में इस साल धान खरीदी के आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। सरकार के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 33 में से 30 जिलों में धान की आवक में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि जिन क्षेत्रों में उत्पादन कम बताया गया था, वहां खरीदी का ग्राफ अचानक ऊपर चढ़ गया। इस विसंगति ने सरकारी सिस्टम और गिरदावरी (फसल माप) की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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30 जिलों में क्यों गिरा ग्राफ?
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो छत्तीसगढ़ के अधिकांश प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में इस बार खरीदी का स्कोर कार्ड नीचे रहा। मौसम की मार और कटाई के दौरान हुई देरी ने 30 जिलों के गणित को बिगाड़ दिया। हालांकि, 3 जिलों ने इस ट्रेंड को मात देते हुए बढ़त बनाई, लेकिन पूरे प्रदेश का ओवरऑल डेटा पिछले साल के मुकाबले कमजोर नजर आ रहा है।
“उत्पादन और खरीदी के बीच का असंतुलन साफ इशारा कर रहा है कि कहीं न कहीं डेटा मैनेजमेंट या जमीनी रिपोर्टिंग में चूक हुई है।” — कृषि सांख्यिकी विशेषज्ञ
इस रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा वह जिले हैं जिन्हें ‘लो-प्रोडक्शन’ जोन माना जाता है। वहां खरीदी का लक्ष्य न केवल पूरा हुआ बल्कि पिछले रिकॉर्ड भी टूट गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्मगलिंग या फर्जी टोकन का नतीजा हो सकता है। प्रशासन अब इन विशेष जिलों के डेटा की बारीकी से जांच कर रहा है।खरीदी का ग्राफ गिरने से राज्य के राजस्व और मिलिंग लक्ष्य पर असर पड़ना तय है। धान खरीदी की इस सुस्ती का मतलब है कि सरकार को इस बार चावल जमा करने और बारदाना प्रबंधन में अपनी रणनीति बदलनी होगी।



