Digital Arrest , नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ठगों ने खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग नॉन रेजिडेंट इंडियन (NRI) दंपती को 17 दिनों तक मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा। इस दौरान दंपती से करीब 15 करोड़ रुपए की ठगी कर ली गई।
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दिल्ली पुलिस के अनुसार, ठगों ने पहले खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का अधिकारी बताते हुए दंपती को फोन किया। कॉल में कहा गया कि उनके नाम से कई संदिग्ध मोबाइल नंबर जारी हुए हैं, जिनका इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में किया गया है। इसके बाद कॉल को कथित तौर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारी से जोड़ दिया गया।
वीडियो कॉल पर रखी गई 24 घंटे निगरानी
ठगों ने दंपती को डराया कि अगर उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा और उनकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी। इसके बाद उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया गया, जिसे साइबर अपराध की भाषा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है।
अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कराई गई रकम
जांच के नाम पर ठगों ने दंपती से कहा कि उन्हें अपने पैसे “वेरिफिकेशन” के लिए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने होंगे। डर और भ्रम की स्थिति में दंपती ने किस्तों में करीब 15 करोड़ रुपए ठगों द्वारा बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
शक होने पर खुला राज
करीब 17 दिन बाद जब ठगों का व्यवहार और दबाव बढ़ता गया, तब दंपती को संदेह हुआ। उन्होंने अपने परिचितों से बात की और फिर दिल्ली पुलिस से संपर्क किया। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का है, जो सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को डराता है।


