High Court’ बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की पहली ओपन जेल के संचालन को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। बेमेतरा जिले के ग्राम पथर्रा में स्थापित ओपन जेल को पूरी तरह कार्यशील बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं जल्द पूरी करने को कहा गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जेल में जरूरी स्टाफ, सुरक्षा और प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध कराकर इसे अधिसूचित नियमों के अनुरूप संचालित किया जाए।
अधूरी व्यवस्थाओं पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ओपन जेल के संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि ऐसी महत्वपूर्ण जेल व्यवस्था को केवल स्थापित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए आवश्यक मानव संसाधन और बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित करनी होंगी।
अदालत ने संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाएं पूरी करने की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि कोर्ट के निर्देश के बाद ओपन जेल को नियमित रूप से संचालित करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
क्या होती है ओपन जेल?
ओपन जेल पारंपरिक जेलों से अलग व्यवस्था होती है। इसमें पात्र बंदियों को अपेक्षाकृत खुला वातावरण दिया जाता है और उन्हें जिम्मेदारी के साथ सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए तैयार किया जाता है। ऐसे बंदियों को उनकी योग्यता और नियमों के अनुरूप काम करने का अवसर भी दिया जा सकता है।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बंदियों में अनुशासन, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना माना जाता है, ताकि सजा पूरी करने के बाद वे समाज में बेहतर तरीके से पुनर्वासित हो सकें।
स्टाफ और सुरक्षा व्यवस्था होगी अहम
हाईकोर्ट ने ओपन जेल में आवश्यक स्टाफ और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है। जेल के प्रभावी संचालन के लिए जेल अधिकारी, सुरक्षाकर्मी और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी।
इसके अलावा प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी निर्धारित नियमों के अनुसार व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे जेल में रहने वाले बंदियों और वहां तैनात कर्मचारियों के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकेगी।
अदालत ने कहा है कि पथर्रा स्थित ओपन जेल को अधिसूचित नियमों के अनुरूप कार्यशील बनाया जाए। इसका मतलब है कि बंदियों के चयन, रहने, काम करने और अन्य व्यवस्थाओं के लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जाएगा।


