Indore Hospitals Water Contamination: मध्य प्रदेश के इंदौर में सरकारी अस्पतालों के पीने के पानी को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर के नौ प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में कराई गई पानी की जांच में छह अस्पतालों के नमूनों में ई-कोलाई (E-Coli) और कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए हैं। NABL से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में हुई जांच के बाद अस्पतालों में पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इन 6 अस्पतालों के पानी में मिले बैक्टीरिया
जांच रिपोर्ट के अनुसार, एमवाय अस्पताल, पीसी सेठी अस्पताल, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल, मेंटल हॉस्पिटल और जिला अस्पताल के पेयजल नमूनों में जैविक प्रदूषण पाया गया। इन अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को पीने के लिए उपलब्ध कराए जा रहे पानी में ई-कोलाई और कॉलिफॉर्म की मौजूदगी सामने आई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ अस्पतालों में पानी को साफ करने के लिए शोधन व्यवस्था मौजूद होने के बावजूद नमूनों में बैक्टीरिया पाए गए। इससे अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले वाटर सिस्टम की नियमित सफाई और रखरखाव पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कूलरों के आसपास गंदगी बनी बड़ी वजह
जांच के दौरान कई अस्पतालों में वाटर कूलरों के आसपास गंदगी और अस्वच्छता की स्थिति सामने आई। कुछ जगहों पर पानी की आपूर्ति और शोधन से जुड़ी व्यवस्थाएं भी ठीक से काम नहीं कर रही थीं।
खास तौर पर चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में वाटर कूलर के आसपास साफ-सफाई की स्थिति खराब मिली। यह चिंता इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यहां नवजात और छोटे बच्चों का इलाज किया जाता है।
वहीं, मेंटल हॉस्पिटल और जिला अस्पताल में वाटर कूलर खराब पाए जाने के कारण मटकों और लोटों के जरिए पानी उपलब्ध कराया जा रहा था। ऐसी व्यवस्था में पानी के दूषित होने का खतरा और बढ़ जाता है।
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नवजात और ICU मरीजों के लिए ज्यादा खतरा
ई-कोलाई और कॉलिफॉर्म की मौजूदगी आमतौर पर पानी में मल संबंधी प्रदूषण की ओर संकेत करती है। दूषित पानी के सेवन से संक्रमण और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। अस्पतालों में भर्ती नवजात शिशु, ICU मरीज, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज और ऑपरेशन से गुजर रहे लोगों के लिए स्वच्छ पानी बेहद महत्वपूर्ण होता है।
हालांकि, पानी के नमूनों में बैक्टीरिया मिलने का मतलब यह नहीं है कि हर मरीज संक्रमित हो गया है, लेकिन अस्पताल जैसी जगह पर ऐसी स्थिति संक्रमण नियंत्रण के लिहाज से गंभीर चिंता जरूर पैदा करती है।
सिर्फ इन 3 अस्पतालों का पानी मिला सुरक्षित
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में एमटीएच, बाणगंगा और एमआरटीबी अस्पताल के पानी को मानव उपभोग के लिए उपयुक्त पाया गया। यानी जांच किए गए नौ संस्थानों में से केवल तीन के नमूने मानकों के अनुरूप पाए गए, जबकि छह अस्पतालों में पानी की गुणवत्ता को लेकर समस्या सामने आई।
अधिकारी ने क्या कहा?
मामले पर एमजीएम मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल संक्रमण नियंत्रण समिति (HICC) की ओर से निर्धारित अंतराल पर पानी के नमूनों की जांच कराई जाती है। यदि जांच में किसी तरह की कमी सामने आती है तो संबंधित अस्पताल प्रबंधन को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए जाते हैं।
Indore Hospitals Water Contamination का यह मामला अस्पतालों में स्वच्छ पेयजल, वाटर कूलर की नियमित सफाई और पानी की शोधन व्यवस्था की निगरानी को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। ખાસ तौर पर नवजात और गंभीर मरीजों वाले अस्पतालों में पानी की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकता है।


