Makar sankranti, मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश के रूप में मनाया जाता है। इस दिन स्नान, दान और जप का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर गंगा स्नान और दान करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
मकर संक्रांति पर क्यों है गंगा स्नान का महत्व?
शास्त्रों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन देवता पृथ्वी पर अवतरित होते हैं और गंगा जल में दिव्य ऊर्जा का संचार होता है। इस दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से:
-
पापों का नाश होता है
-
आत्मा की शुद्धि होती है
-
जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है
गंगा स्तोत्र का पाठ क्यों है फलदायी?
मकर संक्रांति के दिन यदि स्नान के बाद गंगा स्तोत्र का पाठ किया जाए, तो पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है। गंगा स्तोत्र माँ गंगा की महिमा, पवित्रता और करुणा का वर्णन करता है।
गंगा स्तोत्र के लाभ:
-
मानसिक शांति और सकारात्मकता
-
रोग, दोष और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति
-
पितृ दोष और ग्रह बाधाओं में राहत
-
मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त
मकर संक्रांति पर गंगा स्तोत्र पाठ की विधि
-
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें
-
संभव हो तो गंगा स्नान करें, अन्यथा गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें
-
स्वच्छ वस्त्र धारण करें
-
सूर्यदेव को अर्घ्य दें
-
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके गंगा स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करें
-
अंत में दान करें—तिल, गुड़, वस्त्र या अन्न
मकर संक्रांति पर दान का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान हजार गुना फल देता है। विशेष रूप से इन वस्तुओं का दान श्रेष्ठ माना गया है:
-
तिल और गुड़
-
कंबल और वस्त्र
-
अन्न और घी
सूर्य उपासना से मिलेगा आरोग्य और समृद्धि
मकर संक्रांति सूर्यदेव को समर्पित पर्व है। इस दिन सूर्य की उपासना करने से:
-
रोगों से मुक्ति
-
तेज, यश और समृद्धि की प्राप्ति
-
आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि


