जंगल के सन्नाटे में छिपा खतरा
सर्च टीम आगे बढ़ रही थी। हर कदम फूंक-फूंककर रखा जा रहा था। सूचना पुख्ता थी—कुछ बड़ा छिपा है। घने पेड़ों के बीच एक संदिग्ध जगह। खुदाई शुरू हुई। कुछ ही देर में तस्वीर साफ—विस्फोटक का जखीरा। IED बनाने की सामग्री, डेटोनेटर, और अन्य उपकरण—सब कुछ एक ही जगह पर छिपाया गया था।यह सिर्फ सामान नहीं था। यह आने वाले हमलों की तैयारी थी।
समर्पण के बाद खुल रहे राज
हाल के महीनों में कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इन्हीं से मिली जानकारी अब जमीन पर असर दिखा रही है। सूत्र बताते हैं—यह डंप लंबे समय से इस्तेमाल के लिए तैयार रखा गया था। अगर समय रहते नहीं मिलता, तो बड़ा नुकसान हो सकता था।एक जवान ने कहा, “जंगल शांत दिखता है, लेकिन खतरा हर कदम पर छिपा होता है।” आप महसूस कर सकते हैं—हर ऑपरेशन में कितना दबाव रहता है।


