Parivartini Ekadashi 2026 : नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना गया है। सालभर में आने वाली 24 एकादशियों में प्रत्येक का अपना अलग धार्मिक महत्व है। इन्हीं में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के साथ व्रत रखने की परंपरा है।
क्यों कहा जाता है परिवर्तिनी एकादशी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं। परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। इसी वजह से इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी या पार्श्व परिवर्तन एकादशी कहा जाता है।
मान्यता है कि भगवान विष्णु के करवट बदलने का यह प्रसंग आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विधान
परिवर्तिनी एकादशी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, फल और नैवेद्य अर्पित करने की परंपरा है।
इसके साथ ही मां लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। भक्त भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
व्रत रखने से क्या मिलता है फल?
धार्मिक मान्यताओं में परिवर्तिनी एकादशी के व्रत को पापों के नाश और पुण्य की प्राप्ति से जोड़ा गया है। माना जाता है कि इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं हैं, इनके परिणामों को आस्था के संदर्भ में ही देखा जाता है।
दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व
परिवर्तिनी एकादशी पर पूजा-पाठ के साथ दान करने की भी परंपरा है। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, धन और अन्य उपयोगी सामग्री का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान पुण्यदायी होता है।
एकादशी पर इन बातों का रखें ध्यान
व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार उपवास करते हैं। कई लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। पूजा के दौरान भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करना शुभ माना जाता है। एकादशी व्रत का पारण निर्धारित समय पर करने की परंपरा है। पूजा और व्रत से जुड़े स्थानीय पंचांग के समय का पालन करना उचित माना जाता है।


