Sawan Shivratri 2026: सावन की शिवरात्रि भगवान शिव के भक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक कर सुख-समृद्धि, आरोग्य और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि पर सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा का विशेष महत्व होता है।
हालांकि, शिव पूजा के दौरान कुछ चीजों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की मान्यता है। कहा जाता है कि अनजाने में की गई कुछ गलतियों से पूजा की विधि प्रभावित हो सकती है। अगर आप भी सावन शिवरात्रि का व्रत रख रहे हैं या शिवालय में पूजा करने जा रहे हैं, तो इन नियमों का ध्यान जरूर रखें।
1. शिवलिंग पर हल्दी और सिंदूर न चढ़ाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर हल्दी और सिंदूर अर्पित करने से बचना चाहिए। हल्दी और सिंदूर को मुख्य रूप से सौभाग्य एवं श्रृंगार से जुड़ा माना जाता है। भगवान शिव की पूजा में इसके स्थान पर भस्म, सफेद चंदन और अक्षत अर्पित करना शुभ माना जाता है।
2. केतकी और तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं
भगवान शिव को कई तरह के फूल और पत्ते प्रिय माने जाते हैं, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में केतकी के फूल को शिव पूजा में अर्पित करने से मना किया गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, केतकी के फूल से जुड़ी एक घटना के कारण भगवान शिव ने इसे अपनी पूजा से अलग कर दिया था।
इसी तरह शिवलिंग पर तुलसी दल चढ़ाने की भी परंपरा नहीं है। इसलिए सावन शिवरात्रि की पूजा में इन दोनों से परहेज करना चाहिए।
3. टूटे या खंडित बेलपत्र अर्पित न करें
भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना जाता है। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वह साफ और अखंड हो। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तीन पत्तियों वाला बेलपत्र शिव पूजा में विशेष महत्व रखता है।
इसलिए बेलपत्र चढ़ाने से पहले उसे अच्छी तरह जांच लें और कटा-फटा या खंडित बेलपत्र अर्पित करने से बचें।
4. शंख से शिवलिंग पर जलाभिषेक न करें
शिव पूजा के दौरान शंख का इस्तेमाल न करने की धार्मिक मान्यता है। पौराणिक कथाओं में शंखचूड़ और भगवान शिव से जुड़ी कथा का उल्लेख मिलता है। इसी वजह से शिवलिंग पर शंख से जल या दूध चढ़ाने से परहेज किया जाता है।
शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए लोटे या अन्य उपयुक्त पात्र का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है।
5. तांबे के बर्तन में दूध चढ़ाने से बचें
जलाभिषेक के लिए तांबे के पात्र का इस्तेमाल आम तौर पर किया जाता है, लेकिन दूध चढ़ाते समय तांबे के बर्तन से बचने की धार्मिक मान्यता है। इसलिए अगर आप शिवलिंग पर दूध अर्पित कर रहे हैं तो पीतल, कांस्य या चांदी के पात्र का इस्तेमाल करने की परंपरा बताई जाती है।
हालांकि, पूजा की स्थानीय परंपरा और मंदिर के नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए मंदिर में निर्धारित विधि का पालन करना उचित है।
6. शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करें
शिवलिंग की परिक्रमा को लेकर भी विशेष धार्मिक मान्यता है। शिवलिंग से अभिषेक का जल जिस स्थान से बाहर निकलता है, उसे सोमसूत्र या निर्मली कहा जाता है। मान्यता है कि इसे लांघना नहीं चाहिए।
इसी कारण कई परंपराओं में शिवलिंग की अर्ध परिक्रमा करने की सलाह दी जाती है। श्रद्धालुओं को सोमसूत्र को पार करने से बचना चाहिए।
सावन शिवरात्रि पर क्या चढ़ाएं?
सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, सफेद चंदन, अक्षत और धतूरा आदि अर्पित करने की परंपरा है। पूजा करते समय सबसे महत्वपूर्ण चीज श्रद्धा और स्वच्छता मानी जाती है।
पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
- शिवलिंग पर स्वच्छ जल से अभिषेक करें।
- बेलपत्र साफ और अखंड हो।
- केतकी और तुलसी दल अर्पित न करें।
- शिवलिंग पर हल्दी और सिंदूर चढ़ाने से बचें।
- अभिषेक के दौरान मंदिर की परंपरा और पुजारी के निर्देशों का पालन करें।
- पूजा के दौरान मन को शांत रखें और भगवान शिव का ध्यान करें।


