Hum Vatan News
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश – विदेश
  • उद्योग
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Reading: SC Guidelines on Rape Cases : रेप और अन्य यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई: अब फैसलों में नहीं होंगे ‘बेबस महिला’ और ‘पवित्रता’ जैसे शब्द
Font ResizerAa
Hum Vatan NewsHum Vatan News
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश – विदेश
  • उद्योग
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश – विदेश
  • उद्योग
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.

Home » SC Guidelines on Rape Cases : रेप और अन्य यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई: अब फैसलों में नहीं होंगे ‘बेबस महिला’ और ‘पवित्रता’ जैसे शब्द

Featurednational

SC Guidelines on Rape Cases : रेप और अन्य यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई: अब फैसलों में नहीं होंगे ‘बेबस महिला’ और ‘पवित्रता’ जैसे शब्द

Hum Vatan News
Last updated: August 4, 2026 1:22 PM
By
Hum Vatan News
Share
SHARE
× Popup Image

नई दिल्ली: SC Guidelines on Rape Cases रेप और अन्य यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई: नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रेप और अन्य यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई को अधिक संवेदनशील और पीड़ित-केंद्रित बनाने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक कार्यवाही और फैसलों में ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जो पीड़ित की गरिमा को ठेस पहुंचाए या पितृसत्तात्मक सोच को बढ़ावा दे।

Contents
125 ट्रायल कोर्ट के फैसलों का किया गया विश्लेषणपीड़ित-केंद्रित न्याय पर जोरदेरी, चोट या विरोध न करने को सहमति न माना जाएट्रायल के दौरान जजों के लिए अहम निर्देशपितृसत्तात्मक सोच वाली भाषा से बचने की सलाहक्यों बनाई गई यह समिति?

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘लज्जा भंग’, ‘बेबस महिला’, ‘पवित्रता खो दी’, ‘हवस का शिकार’ जैसे शब्दों से बचा जाए। इनके स्थान पर ‘पीड़ित (Victim)’, ‘सर्वाइवर (Survivor)’, ‘शिकायतकर्ता (Complainant)’, ‘शारीरिक स्वायत्तता (Bodily Autonomy)’ और ‘यौन हमला (Sexual Assault)’ जैसे तटस्थ एवं सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया जाए।

- Advertisement -
HTML5 Icon

125 ट्रायल कोर्ट के फैसलों का किया गया विश्लेषण

‘Judgments and Gender: Sensitivity and Compassion in Writing Judgments’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति ने तैयार की है। रिपोर्ट देशभर की ट्रायल कोर्ट के 125 फैसलों के अध्ययन और विभिन्न राज्य न्यायिक अकादमियों के सहयोग से तैयार की गई।

- Advertisement -
HTML5 Icon

पीड़ित-केंद्रित न्याय पर जोर

रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जजों को पीड़ितों, गवाहों और अन्य संवेदनशील पक्षों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। अदालतों को ऐसे सवाल पूछने या टिप्पणियां करने से बचना चाहिए जो पीड़ित को दोषी ठहराने वाली मानसिकता को बढ़ावा दें।

समिति ने यह भी कहा कि किसी भी परिस्थिति में पीड़ित को आरोपी से बातचीत या समझौते के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

क्रिकेट नहीं, अब स्पीड का खेल’ चेन्नई में बाइक रेसिंग करते दिखे MS Dhoni’ फैंस हुए रोमांचित

देरी, चोट या विरोध न करने को सहमति न माना जाए

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यदि पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराने में देरी की है, शरीर पर चोट के निशान नहीं हैं या उसने शारीरिक विरोध नहीं किया, तो इसे सहमति का प्रमाण नहीं माना जा सकता। हर व्यक्ति सदमे की स्थिति में अलग-अलग प्रतिक्रिया देता है और अदालतों को पूर्वाग्रह से बचना चाहिए।

ट्रायल के दौरान जजों के लिए अहम निर्देश

विशेषज्ञ समिति ने ट्रायल कोर्ट के जजों को निर्देश दिया है कि वे अपमानजनक या अनावश्यक जिरह पर रोक लगाएं। विशेष रूप से पीड़ित के यौन इतिहास, कपड़ों या व्यक्तिगत व्यवहार से जुड़े सवालों को अनुमति न दी जाए।

इसके अलावा अदालतों को यह भी सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि:

  • पीड़ित को अदालत में सम्मानजनक माहौल मिले।
  • गवाही के दौरान गैर-जरूरी लोगों को कोर्ट रूम से बाहर रखा जाए।
  • पीड़ित के बैठने, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं का ध्यान रखा जाए।
  • आवश्यकता होने पर इन-कैमरा ट्रायल, कानूनी सहायता और गवाह सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।

पितृसत्तात्मक सोच वाली भाषा से बचने की सलाह

रिपोर्ट में कहा गया है कि सम्मान, शर्म, पवित्रता और शुद्धता जैसे शब्द महिलाओं की गरिमा को उनकी यौन पवित्रता से जोड़ते हैं, जो संविधान की समानता और गरिमा की भावना के अनुरूप नहीं है। इसलिए न्यायिक तर्क का केंद्र सहमति, गरिमा, शारीरिक स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकार होने चाहिए।

क्यों बनाई गई यह समिति?

यह विशेषज्ञ समिति सुप्रीम कोर्ट के 10 फरवरी 2026 के आदेश के बाद गठित की गई थी। यह आदेश उस समय आया था जब अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक विवादित फैसले का स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद यौन अपराधों की सुनवाई में संवेदनशीलता बढ़ाने और न्यायिक भाषा को अधिक सम्मानजनक बनाने के उद्देश्य से विस्तृत दिशानिर्देश तैयार किए गए।

Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Copy Link Print
Advertisement Carousel

Latest Post

Twisha Sharma Death Case’ ट्विशा शर्मा केस’ CBI ने दाखिल की 636 पन्नों की चार्जशीट, समर्थ-गिरिबाला पर दहेज हत्या का आरोप
Featured देश - विदेश
छत्तीसगढ़ की माटी, कृषि परंपरा और मेहनतकश अन्नदाता किसान सदैव हृदय के सबसे करीब : मुख्यमंत्री श्री साय.
अन्य छत्तीसगढ़ देश - विदेश
Human Trafficking: पढ़ाई-नौकरी का झांसा देकर छत्तीसगढ़ की बेटियों को अलीगढ़ में बेचता था गिरोह, 3 बच्चियों का रेस्क्यू
Featured छत्तीसगढ़
Mahakal Temple Stampede : उज्जैन महाकाल मंदिर में मची अफरा-तफरी, करंट की अफवाह से बढ़ा भीड़ का दबाव
Featured national
शतक ठोककर Devdutt Padikkal’ ने पेश की दावेदारी, नंबर-3 स्पॉट को लेकर बढ़ा सस्पेंस
Featured खेल
Iran-US Conflict : अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने पर मिलेगा 30 हजार डॉलर, महिला को 60 हजार
Featured देश - विदेश
Govinda-Sunita ‘विवाद पर सोमी अली का रिएक्शन वायरल, एक्ट्रेस ने ‘हीरो नंबर 1’ को किया सपोर्ट
Featured मनोरंजन
CG Government Jobs 2026 : सुपरवाइजर के 50 पदों पर सीधी भर्ती, वित्त विभाग ने दी हरी झंडी
Featured छत्तीसगढ़

You Might Also Like Related

Featuredछत्तीसगढ़

CG News : छत्तीसगढ़ में सरकारी आवास बना विवाद का केंद्र, युवक-युवतियों की मौजूदगी से हंगामा’ रातभर बंद रहे दो युवक

By
Hum Vatan News
3 Min Read
Featuredreligion

Surefire Remedies for Monday : भोलेनाथ को प्रसन्न करने का आसान तरीका, सोमवार के दिन करें ये ‘खास उपाय

By
Hum Vatan News
3 Min Read
Featuredदेश - विदेश

BREAKING NEWS : तारापीठ में आग का तांडव’ होटल में धधकी भीषण आग, 7 लोगों की मौत और कई घायल

By
Hum Vatan News
3 Min Read
Previous Next
Hum Vatan News

Categories

  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश – विदेश
  • उद्योग
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

Follow for More

Quick Links

  • Privacy Policy
  • Contact
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
« Jul    

Hum Vatan News. Nimble Technology Design Company. All Rights Reserved.

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?