- नई सीमा: बजट 2025-26 के बाद सीनियर सिटीजंस के लिए टीडीएस (TDS) छूट की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 कर दी गई है।
- सामान्य नागरिक: रेगुलर निवेशकों के लिए भी यह लिमिट ₹40,000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दी गई है।
- बड़ा फायदा: नए टैक्स रिजीम में ₹12 लाख तक की सालाना आय पर अब कोई टैक्स नहीं देना होगा (धारा 87A के तहत)।
Senior Citizen FD Rules नई दिल्ली — फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को हमेशा से वरिष्ठ नागरिकों के लिए निवेश का सबसे सुरक्षित और पसंदीदा जरिया माना जाता रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने सीनियर सिटीजंस को बड़ी राहत देते हुए ब्याज पर कटने वाले टीडीएस (Tax Deducted at Source) के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।
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Senior Citizen FD Rules

टीडीएस की सीमा में बड़ा उछाल
अब तक बैंकों या वित्तीय संस्थानों में जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज ₹50,000 से अधिक होने पर बैंक 10% की दर से टीडीएस काटते थे। लेकिन नए नियमों के तहत अब वरिष्ठ नागरिकों के मामले में यह सीमा ₹1 लाख कर दी गई है। यानी अगर आपका सालाना ब्याज ₹1,00,000 तक है, तो बैंक उस पर कोई कटौती नहीं करेगा। सामान्य नागरिकों के लिए यह सीमा अब ₹50,000 है।
₹12 लाख तक की आय पर ‘जीरो’ टैक्स
नए टैक्स रिजीम को चुनने वाले सीनियर सिटीजंस के लिए राहत और भी ज्यादा है। धारा 87A के तहत मिलने वाले टैक्स रिबेट की सीमा बढ़ा दी गई है। अब ₹12 लाख तक की सालाना टैक्सेबल इनकम पर शून्य टैक्स लगेगा।
“अगर किसी वरिष्ठ नागरिक की कुल आय ₹12 लाख से कम है, लेकिन ब्याज ₹1 लाख से अधिक है, तो बैंक टीडीएस काटेगा। इस कटौती से बचने के लिए निवेशकों को बैंक में फॉर्म 15H जमा करना चाहिए।”
— टैक्स एक्सपर्ट
फॉर्म 15H क्यों है जरूरी?
अक्सर देखा गया है कि बैंकों को व्यक्तिगत टैक्स लायबिलिटी का पता नहीं होता। कानूनन, जैसे ही ब्याज सीमा (₹1 लाख) पार करता है, बैंक ऑटोमैटिक तरीके से टीडीएस काट लेते हैं। यदि आपकी कुल वार्षिक आय ₹12 लाख से कम है और आप टैक्स के दायरे में नहीं आते, तो फॉर्म 15H भरकर आप बैंक को टीडीएस काटने से रोक सकते हैं।
ब्याज पर भी मिलता है ब्याज
यदि बैंक ने गलती से या फॉर्म जमा न करने की स्थिति में टीडीएस काट लिया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आप इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करके इस राशि को रिफंड के रूप में वापस पा सकते हैं। खास बात यह है कि यदि रिफंड में देरी होती है, तो आयकर विभाग उस रिफंड राशि पर ब्याज भी देता है।
निष्कर्ष: ये बदलाव उन रिटायर्ड लोगों के लिए वरदान हैं जो अपनी दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह से ब्याज की आय पर निर्भर हैं। इससे न केवल उनके हाथ में ज्यादा कैश बचेगा, बल्कि रिटर्न फाइल करने की जटिलताओं से भी राहत मिलेगी।


