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Som Pradosh Vrat 2026 : शिव-पार्वती की कृपा का महासंयोग सोम प्रदोष पर इस विधि से करें पूजा, दूर होंगे सारे कष्ट

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Last updated: March 16, 2026 1:57 PM
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Som Pradosh Vrat 2026
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  • महासंयोग: सोमवार और प्रदोष तिथि के मिलन से बना ‘सोम प्रदोष’, महादेव की कृपा के लिए सबसे खास दिन।
  • पूजा का नियम: बिना व्रत कथा पढ़े या सुने अधूरी मानी जाती है प्रदोष की पूजा।
  • शुभ फल: प्रदोष काल में शिव आराधना से मानसिक शांति और आर्थिक कष्टों से मिलती है मुक्ति

Som Pradosh Vrat 2026 , नई दिल्ली — हिंदू पंचांग के अनुसार आज 16 मार्च, सोमवार को साल 2026 का महत्वपूर्ण सोम प्रदोष व्रत रखा जा रहा है। सोमवार का दिन स्वयं महादेव को समर्पित है और जब इसी दिन त्रयोदशी तिथि का प्रदोष काल मिलता है, तो यह साधकों के लिए किसी ‘गोल्डन अपॉर्चुनिटी’ से कम नहीं होता। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के समय शिव जी कैलाश पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। लेकिन याद रहे, इस व्रत का पूरा फल तभी मिलता है जब आप विधि-विधान से इसकी पौराणिक कथा का पाठ करते हैं।

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सोम प्रदोष व्रत कथा: एक गरीब ब्राह्मण की अटूट श्रद्धा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक गरीब ब्राह्मणी रहती थी। उसके पति का देहांत हो चुका था और वह अपने पुत्र के साथ भिक्षा मांगकर गुजर-बसर करती थी। एक दिन भिक्षा मांगकर लौटते समय उसे विदर्भ देश का राजकुमार मिला, जो शत्रुओं के आक्रमण के कारण दर-दर भटक रहा था। ब्राह्मणी उसे अपने घर ले आई।

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कुछ समय बाद ब्राह्मणी अपने दोनों बालकों के साथ ऋषि शांडिल्य के आश्रम गई। वहां ऋषि ने उन्हें प्रदोष व्रत की महिमा बताई। ब्राह्मणी ने पूरी श्रद्धा के साथ यह व्रत करना शुरू किया। कुछ दिनों बाद दोनों बालक वन में विहार कर रहे थे, तभी राजकुमार की मुलाकात गंधर्व कन्या ‘अंशुमती’ से हुई। भोलेनाथ की कृपा से राजकुमार और अंशुमती का विवाह हुआ और राजकुमार ने अपनी खोई हुई सत्ता वापस पा ली। यह सब ब्राह्मणी के सोम प्रदोष व्रत के प्रभाव से संभव हुआ।

आज शाम को सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है। इस समय को ही प्रदोष काल कहा जाता है। भक्तों को चाहिए कि वे स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें और बेलपत्र अर्पित करें।

“प्रदोष व्रत करने वाले भक्तों के सभी पाप धुल जाते हैं और उन्हें अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेषकर सोम प्रदोष व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी करने की क्षमता रखता है।”
— स्कंद पुराण

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, चंद्रमा मन का कारक है और सोमवार का स्वामी है। प्रदोष व्रत करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है। जो लोग मानसिक तनाव या स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनके लिए आज की पूजा एक ‘रिकवरी बूस्टर’ की तरह काम करती है। अगला प्रदोष व्रत अब कृष्ण पक्ष में आएगा, इसलिए आज का दिन चूकना भारी पड़ सकता है। यदि आप व्रत नहीं भी रख पाए हैं, तो शाम को शिव मंदिर में दीपदान और कथा का श्रवण मात्र करने से भी शिव-शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा के ‘पीक’ पर होता है, जिसका लाभ हर श्रद्धालु को उठाना चाहिए।

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