भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रहार
राजदूत हरीश ने रेखांकित किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले व्यापार में रुकावट भारत की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। गौरतलब है कि वैश्विक जीवाश्म ईंधन व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। भारत ने खेद व्यक्त किया कि व्यावसायिक जहाजों को सैन्य हमलों का निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम दोहराते हैं कि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाना, चालक दल के निर्दोष सदस्यों की जान जोखिम में डालना या नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा डालना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
भारतीय नाविकों की जान का नुकसान
भारत ने इस संघर्ष के मानवीय पहलू को भी प्रमुखता से उठाया। पर्वथनेनी हरीश ने बताया कि इस समुद्री तनाव के दौरान कई भारतीय नाविकों ने अपनी जान गंवाई है। हालिया मार्च में ‘स्काईलैंट’ जैसे टैंकरों पर हुए हमलों में भारतीय नागरिक हताहत हुए थे। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे संयम बरतें और तनाव को कम करने के लिए कूटनीति का रास्ता अपनाएं।
“होर्मुज में जो हो रहा है वह सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था का गला घोंटने जैसा है। हमारे नाविकों की जान और हमारी ऊर्जा ज़रूरतें किसी भी भू-राजनीतिक दांव-पेंच से ऊपर हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून महज कागजों पर नहीं, समुद्र में भी दिखने चाहिए।”
— पर्वथनेनी हरीश, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि
संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह कड़ा रुख तब आया है जब ईरान द्वारा जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और हाल ही में अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई नाकेबंदी ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया है। अमेरिका द्वारा 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के बाद भारत के लिए स्थिति और जटिल हो गई है। भारत ने इस मुद्दे पर ‘तटस्थ’ रहते हुए भी नौवहन की स्वतंत्रता के लिए चीन और रूस के वीटो के खिलाफ चिंता जताई है। आने वाले दिनों में भारत, फ्रांस और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इस समुद्री मार्ग को खुला रखने के लिए कूटनीतिक दबाव बढ़ा सकता है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें पहले ही 120 डॉलर प्रति बैरल को पार कर चुकी हैं।



