राजनांदगांव।’ छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शिक्षिका की बेरहमी ने 7वीं कक्षा के छात्र को उम्रभर का दर्द दे दिया। डोंगरगढ़ स्थित खालसा पब्लिक स्कूल में एक छात्र द्वारा समय पर किताब नहीं निकालने पर शिक्षिका ने उसे इतने जोर से थप्पड़ जड़े कि उसके दोनों कानों के पर्दे गंभीर रूप से प्रभावित हो गए हैं। मेडिकल जांच में पुष्टि हुई है कि बच्चे के सुनने की क्षमता (हियरिंग कैपेसिटी) लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक डैमेज हो गई है। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षिका को गिरफ्तार कर लिया है।
मामूली बात पर आपा खो बैठी शिक्षिका
घटना के अनुसार, स्कूल में पढ़ाई के दौरान शिक्षिका ने छात्र को बैग से किताब निकालने के लिए कहा था। छात्र को किताब ढूंढने में थोड़ी देर हो गई, जिससे शिक्षिका आक्रोशित हो गईं। उन्होंने छात्र के गालों और कान के पास लगातार चार जोरदार थप्पड़ जड़ दिए। स्कूल से घर लौटने के बाद छात्र ने कान में तेज दर्द और सुनाई न देने की शिकायत अपने माता-पिता से की।
जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
परिजनों ने जब बच्चे को विशेषज्ञ डॉक्टर के पास ले जाकर उसकी जांच कराई, तो रिपोर्ट बेहद डरावनी निकली। डॉक्टरों के अनुसार, टीचर की पिटाई की वजह से बच्चे के कानों के आंतरिक हिस्से में गंभीर चोट आई है।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए छात्र के पिता ने डोंगरगढ़ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस ने धारा 323, 506 और किशोर न्याय (जेजे) एक्ट की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। राजनांदगांव पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षिका को हिरासत में ले लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा के मंदिर में बच्चों के साथ इस तरह का हिंसक व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्कूल प्रबंधन पर उठे सवाल
इस घटना के बाद स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पालकों का कहना है कि स्कूलों में शारीरिक दंड पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद इस तरह की क्रूरता कैसे हुई? जिला शिक्षा विभाग ने भी मामले का संज्ञान लिया है और स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। यदि स्कूल की लापरवाही सिद्ध होती है, तो मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा की मांग
यह मामला सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में है। लोग मांग कर रहे हैं कि स्कूलों में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी बढ़ाई जाए और शिक्षकों की काउंसलिंग की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य मासूम को टीचर की पिटाई का शिकार न होना पड़े।



