“हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया”: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की बेंच ने तेलंगाना सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। सरकार ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें खेड़ा को ट्रांजिट जमानत दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया और खेड़ा को ट्रांजिट जमानत देने का कोई ठोस आधार नहीं था।
यह मामला खेड़ा द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई कुछ कथित टिप्पणियों से जुड़ा है। इस संबंध में तेलंगाना पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद, खेड़ा को तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश न्यायसंगत नहीं था और खेड़ा को अब तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ सकता है या फिर अपनी गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट को इस तरह के मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए और अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम नहीं करना चाहिए।
“हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। हम कानूनी सलाह लेंगे और उचित कार्रवाई करेंगे। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और हम उम्मीद करते हैं कि खेड़ा जी को न्याय मिलेगा।”
— जयराम रमेश, कांग्रेस नेता
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब पार्टी तेलंगाना में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। खेड़ा कांग्रेस के एक प्रमुख नेता हैं और उनकी गिरफ्तारी पार्टी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचा सकती है। अब, सबकी नजरें कांग्रेस की रणनीति और खेड़ा की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह स्पष्ट है कि यह मामला आने वाले समय में राजनैतिक चर्चा का एक प्रमुख विषय बना रहेगा और यह देखना दिलचस्प होगा कि यह तेलंगाना की राजनीति को कैसे प्रभावित करता है।



