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Supreme Court Railway Compensation : रेल हादसे के पीड़ित परिवार को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल का फैसला पलटा

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Last updated: July 18, 2026 1:02 PM
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Supreme Court Railway Compensation: सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे यात्रियों की गरिमा और दुर्घटना मुआवजा मामलों को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि ‘सेकेंड क्लास’ शब्द का इस्तेमाल केवल रेलवे कोच के लिए होना चाहिए, यात्रियों के लिए नहीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल टिकट बरामद न होने के आधार पर किसी मृतक को वैध यात्री (बोना फाइड पैसेंजर) मानने से इनकार नहीं किया जा सकता।

Contents
Supreme Court Railway Compensation2015 के ट्रेन हादसे का मामलासुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियांरेलवे को भी दिए सुझाव

Supreme Court Railway Compensation

Supreme Court Railway Compensation
Supreme Court Railway Compensation

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के फैसले को पलटते हुए ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले यात्री के परिवार को ₹8 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर राशि जारी करने के निर्देश दिए। यदि भुगतान में देरी होती है तो दावा दायर करने की तारीख से 8% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

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2015 के ट्रेन हादसे का मामला

यह मामला नवंबर 2015 का है। मध्य प्रदेश के रहने वाले चंद्रकांत ठक्कर रायपुर से अहमदाबाद की यात्रा कर रहे थे। सफर के दौरान वे अहमदाबाद-हावड़ा मेल से गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई। हादसे के बाद उनका बैग भी गायब हो गया, जिसमें यात्रा टिकट होने की बात कही गई थी।

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टिकट बरामद नहीं होने के कारण रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल और बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उन्हें वैध यात्री मानने से इनकार कर दिया था और मुआवजा देने से मना कर दिया। अब सुप्रीम कोर्ट ने दोनों फैसलों को रद्द करते हुए मृतक की पत्नी लता ठक्कर को ₹8 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणियां

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेलवे दुर्घटना मुआवजा कानून एक कल्याणकारी कानून है, इसलिए इसकी संकीर्ण नहीं बल्कि उदार व्याख्या की जानी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल टिकट नहीं मिलने से किसी व्यक्ति का वैध यात्री होने का अधिकार समाप्त नहीं हो जाता। यदि दावेदार शपथपत्र और अन्य साक्ष्यों के आधार पर प्रारंभिक दावा साबित कर देता है, तो उसे गलत साबित करने की जिम्मेदारी रेलवे की होगी।

कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रेन दुर्घटनाओं की पूरी जिम्मेदारी केवल रेलवे पर नहीं डाली जा सकती। यात्रियों को भी अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना चाहिए और चलती ट्रेन पकड़ने, दरवाजे पर लटककर यात्रा करने जैसी जोखिम भरी गतिविधियों से बचना चाहिए।

रेलवे को भी दिए सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे को भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और पर्याप्त स्टाफ की नियुक्ति करने की सलाह दी। अदालत ने कहा कि पर्याप्त मानवबल होने से टिकट जांच, भीड़ नियंत्रण और दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराना अधिक प्रभावी होगा। इससे यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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