Supreme Court , नई दिल्ली। देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तीखी टिप्पणी की। अदालत में आवारा कुत्तों से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान बहस काफी गंभीर और विस्तृत रही। इस दौरान कुत्तों का मूड, कुत्तों की काउंसलिंग, कम्युनिटी डॉग्स और इंस्टीट्यूशनलाइज्ड डॉग्स जैसे शब्द भी सुनवाई में सामने आए।
Supreme Court : आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त जनता कब तक झेलेगी खतरा?
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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि कुत्तों के कारण आम नागरिक आखिर कब तक परेशानी झेलते रहेंगे। अदालत ने कहा कि आए दिन बच्चों, बुजुर्गों और आम लोगों को कुत्ते काट रहे हैं, कई मामलों में तो लोगों की जान तक चली जा रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन इस गंभीर समस्या को लेकर ठोस कदम नहीं उठा पा रहे हैं।
स्कूल और कोर्ट परिसरों पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से स्कूलों, कोर्ट परिसरों और अन्य संस्थागत क्षेत्रों में कुत्तों की मौजूदगी पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि “स्कूल और कोर्ट जैसे संवेदनशील परिसरों में कुत्तों की आखिर जरूरत क्या है?” यहां बच्चे पढ़ने आते हैं, लोग न्याय के लिए आते हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा सर्वोपरि है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका यह रुख सार्वजनिक सड़कों के लिए नहीं, बल्कि केवल संस्थागत क्षेत्रों (Institutional Areas) के लिए है। कोर्ट ने कहा कि उसके आदेश का गलत अर्थ न निकाला जाए, लेकिन स्कूल, अस्पताल, कोर्ट और सरकारी परिसरों में किसी भी तरह का खतरा स्वीकार्य नहीं है।
पशु प्रेम बनाम मानव सुरक्षा
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि पशु प्रेम के नाम पर इंसानों की जान खतरे में नहीं डाली जा सकती। कुत्तों के व्यवहार, उनके मूड और काउंसलिंग जैसी दलीलें तब तक अर्थहीन हैं, जब तक आम नागरिक सुरक्षित नहीं हैं। कोर्ट ने संकेत दिए कि यदि हालात नहीं सुधरे तो कठोर दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।



