Tamil Language Martyrs Day , चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने रविवार को तमिल भाषा शहीद दिवस के अवसर पर राज्य के भाषा शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और स्पष्ट किया कि तमिलनाडु में हिंदी के लिए कोई जगह नहीं होगी। उन्होंने कहा कि राज्य में कभी भी किसी भी भाषा को जबरदस्ती थोपने का प्रयास असफल रहेगा।
Tamil Language Martyrs Day : तमिल संस्कृति और भाषा की रक्षा को लेकर CM स्टालिन का सशक्त संदेश

सीएम स्टालिन ने अपने भाषण में कहा, “हम हमेशा इस तरह के प्रयासों का विरोध करेंगे। तमिल भाषा और संस्कृति के प्रति हमारा प्रेम कभी नहीं मरेगा। जब भी हमारी भाषा और पहचान पर आघात किया गया, तमिलनाडु ने उसी ऊर्जा और जोश से उसका विरोध किया है।”
उन्होंने कहा कि भाषा शहीदों ने अपनी जान तक की कुर्बानी दी ताकि तमिल भाषा और उसकी विरासत सुरक्षित रह सके। “मैं उन शहीदों को नमन करता हूं, जिन्होंने अपनी जान दे कर तमिल भाषा की रक्षा की। अब भाषा युद्ध में और कोई जान नहीं जाएगी, लेकिन हमें अपनी संस्कृति और भाषा के लिए सतर्क रहना होगा।”

एम. के. स्टालिन ने आगे कहा कि तमिलनाडु में तमिल भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारे इतिहास का प्रतीक है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार तमिल भाषा को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कदम उठाती रहेगी और शिक्षा, प्रशासन और मीडिया में तमिल को प्रमुख स्थान देने का काम जारी रहेगा।
इस अवसर पर सीएम ने तमिल भाषा से जुड़े कई साहित्यकारों और शिक्षाविदों के योगदान को भी सराहा। उन्होंने कहा कि भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह हमारी सोच, हमारी संवेदनाएं और हमारी परंपराओं का आधार है। राज्य में तमिल भाषा शहीद दिवस हर साल 11 जुलाई को मनाया जाता है। यह दिन 20वीं सदी के मध्य में तमिलनाडु में हुई हिंदी विरोधी आंदोलन और संघर्ष की याद दिलाता है, जब तमिल भाषा के समर्थकों ने हिंदी को राज्य में थोपने का विरोध करते हुए अपनी जान की बाज़ी लगा दी थी।

सीएम स्टालिन ने अंत में जोर देकर कहा कि तमिलनाडु की आने वाली पीढ़ी भी अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत के प्रति सजग रहे। “हमारी भाषा हमारे अस्तित्व का हिस्सा है, और इसे संरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी है। तमिल का प्रेम कभी नहीं मरेगा। यह हमारी पहचान है और हमेशा रहेगी।”


