US Work Visa : वॉशिंगटन। अमेरिका में पढ़ाई करने के बाद वहीं नौकरी करने की योजना बना रहे विदेशी छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए H-1B वीजा से जुड़ा प्रस्ताव महत्वपूर्ण हो सकता है। अमेरिकी प्रशासन ने नए H-1B वीजा के लिए फीस को बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर करने का प्रस्ताव दिया है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 1 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है। मौजूदा फीस की तुलना में यह कई गुना अधिक है।
H-1B वीजा क्या है?
H-1B वीजा अमेरिका में विशेषज्ञता वाले पदों पर विदेशी नागरिकों को नौकरी देने की व्यवस्था है। टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, रिसर्च और अन्य विशेष क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियां इसका इस्तेमाल करती हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने पिछले साल भी नए H-1B आवेदनों से जुड़े मामलों में 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त राशि लागू की थी। अब अगस्त 2026 में इसे स्थायी रूप से लागू करने के लिए 1,03,265 डॉलर की प्रस्तावित फीस वाला नियम सामने आया है।
भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स पर क्यों असर?
अमेरिका भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का प्रमुख गंतव्य है। पढ़ाई पूरी करने के बाद बड़ी संख्या में छात्र OPT जैसे रास्तों के जरिए काम का अनुभव हासिल करते हैं और आगे H-1B के जरिए लंबे समय तक नौकरी करने की कोशिश करते हैं।
नई फीस का प्रस्ताव सीधे तौर पर नए H-1B वीजा आवेदनों की लागत बढ़ा सकता है। हालांकि, अमेरिका में पढ़ रहे सभी भारतीय छात्रों पर यह फीस सीधे लागू होगी, ऐसा कहना सही नहीं होगा। इसका प्रभाव मुख्य रूप से उन नए H-1B मामलों पर निर्भर करेगा जो प्रस्तावित नियम के दायरे में आएंगे।
कंपनियों पर पड़ेगा अतिरिक्त खर्च
H-1B प्रक्रिया में फीस और संबंधित खर्च आमतौर पर नियोक्ता की जिम्मेदारी होते हैं। इतनी बड़ी प्रस्तावित फीस का असर उन कंपनियों पर भी पड़ सकता है जो विदेशी विशेषज्ञों को नियुक्त करती हैं।
भारतीय IT कंपनियों और अमेरिकी टेक सेक्टर में इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा तेज है। उद्योग संगठन Nasscom ने भी अमेरिकी सरकार से H-1B कार्यक्रम के आर्थिक और कौशल संबंधी लाभों को ध्यान में रखने की अपील की है।


