Aghor Hanuman : नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान हनुमान को संकटमोचन, भक्तवत्सल और अटूट भक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। देशभर में उनके अनेक स्वरूपों की आराधना होती है, लेकिन हनुमान जी का एक ऐसा स्वरूप भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यह है अघोर हनुमान का स्वरूप, जिसे तंत्र साधना से जुड़ा अत्यंत गोपनीय और दुर्लभ रूप माना जाता है। मान्यता है कि इस स्वरूप की पूजा सामान्य रूप से नहीं की जाती और इसे विशेष साधना पद्धति का हिस्सा माना जाता है।
क्या है अघोर हनुमान का स्वरूप?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ‘अघोर’ शब्द का अर्थ होता है—जो घोर न हो, अर्थात सहज और शांत। हालांकि तंत्र परंपरा में इसका संबंध भगवान शिव के अघोर रुद्र स्वरूप से जोड़ा जाता है। चूंकि हनुमान जी को भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार माना जाता है, इसलिए उनका अघोर स्वरूप भी विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है।
मान्यता है कि इस स्वरूप में हनुमान जी अत्यंत उग्र, प्रचंड और शक्तिशाली रूप धारण करते हैं। यह स्वरूप नकारात्मक शक्तियों, आसुरी प्रवृत्तियों और गंभीर बाधाओं के नाश का प्रतीक माना जाता है।
गुप्त रूप से क्यों की जाती है पूजा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अघोर हनुमान की साधना सामान्य पूजा-पाठ से अलग होती है। कहा जाता है कि—
- इस साधना को मुख्य रूप से तंत्र परंपरा के साधक और अघोरी करते हैं।
- पूजा विशेष नियमों और अनुशासन के साथ की जाती है।
- साधना प्रायः श्मशान, गुफाओं, जंगलों या विशेष तंत्र पीठों जैसे एकांत स्थानों पर की जाती है।
- कई मान्यताओं में मध्यरात्रि को इस साधना का उपयुक्त समय बताया गया है।
- यह भी माना जाता है कि बिना उचित मार्गदर्शन और विधि के इस प्रकार की साधना नहीं करनी चाहिए।
सामान्य श्रद्धालुओं के लिए क्या है सलाह?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार सामान्य गृहस्थ श्रद्धालुओं को संकटमोचन, बाल हनुमान, वीर हनुमान या भक्त हनुमान जैसे सौम्य स्वरूपों की ही पूजा करने की सलाह दी जाती है। अघोर हनुमान से जुड़ी साधनाएं विशिष्ट परंपराओं का हिस्सा मानी जाती हैं और इन्हें योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही किया जाता है।


