नई दिल्ली। प्रवेश परीक्षा विवाद को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार को बड़ा अल्टीमेटम दिया है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा है कि यदि मंगलवार तक आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों को रिहा नहीं किया गया और सरकार की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिला, तो पार्टी देशभर में दोबारा प्रदर्शन शुरू करेगी। उन्होंने दावा किया कि 25 जुलाई को सरकार की ओर से प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद छात्रों पर कार्रवाई जारी है।
सौरव दास बोले- वादा पूरा नहीं किया गया
प्रेस वार्ता के दौरान सौरव दास ने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में कई राज्यों में आंदोलन में शामिल छात्रों पर कार्रवाई की गई और उन्हें गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार मंगलवार तक सभी गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं करती और लिखित समझौता जारी नहीं करती, तो CJP को अपना आंदोलन फिर से शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कपिल सिब्बल के समर्थन का दावा
सौरव दास ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल भी छात्रों के संवैधानिक अधिकारों के पक्ष में खड़े हैं। उनका कहना है कि छात्रों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार है और आंदोलन को दबाने के बजाय सरकार को संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन का उद्देश्य छात्रों की मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाना है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बनी चर्चा का विषय
इस बीच, प्रदर्शनकारियों पर हुए कथित लाठीचार्ज के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और किसी भी आंदोलन का हवाला देकर पुलिस की कथित ज्यादतियों या लाठीचार्ज को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर बहस तेज हो गई है। अदालत ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
मंगलवार तक सरकार के जवाब का इंतजार
CJP ने स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल मंगलवार तक सरकार के रुख का इंतजार करेगी। यदि इस अवधि में गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और लिखित आश्वासन नहीं मिलता है, तो देशभर में फिर से धरना-प्रदर्शन और आंदोलन शुरू किया जाएगा।
पार्टी का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाई जाएगी।


