Delhi to Raipur Flight : रायपुर। दिल्ली से रायपुर लौट रहे एक यात्री की फ्लाइट छूटने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इंडिगो एयरलाइंस को बड़ा झटका दिया है। आयोग ने फ्लाइट के री-शेड्यूल होने और टर्मिनल बदलने की समय पर जानकारी नहीं देने को उपभोक्ता सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए एयरलाइंस पर 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही आयोग ने एयरलाइन को 45 दिनों के भीतर निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।
समय पर एयरपोर्ट पहुंचने के बावजूद छूट गई फ्लाइट
मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि यात्री निर्धारित समय से पहले एयरपोर्ट पहुंच गया था। हालांकि, फ्लाइट के समय में बदलाव और प्रस्थान टर्मिनल बदलने की सूचना समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके चलते यात्री सही समय पर सही टर्मिनल तक नहीं पहुंच सका और उसकी फ्लाइट छूट गई।
Rahul Gandhi Disproportionate Assets Case: CBI और ED जांच की मांग वाली याचिका पर नया अपडेट
आयोग ने माना कि यदि एयरलाइन समय रहते यात्री को स्पष्ट सूचना देती, तो वह आसानी से अपनी उड़ान पकड़ सकता था। सूचना के अभाव में यात्री को अनावश्यक परेशानी और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
उपभोक्ता सेवा में कमी का माना मामला
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अपने फैसले में कहा कि एयरलाइंस की यह जिम्मेदारी है कि वह यात्रियों को उड़ान से जुड़े सभी महत्वपूर्ण बदलावों की समय पर और प्रभावी तरीके से जानकारी उपलब्ध कराए। ऐसा नहीं करना सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आता है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि आधुनिक विमानन सेवाओं में यात्रियों को समय पर सूचना देना एयरलाइन की मूल जिम्मेदारियों में शामिल है।
45 दिन में देना होगा मुआवजा
आयोग ने इंडिगो एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर 60 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करे। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है, तो एयरलाइंस को तय नियमों के अनुसार ब्याज सहित राशि अदा करनी होगी।
यात्री को हुई आर्थिक और मानसिक परेशानी
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि फ्लाइट छूटने से यात्री को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि उसे मानसिक तनाव और असुविधा का भी सामना करना पड़ा। यात्रा की पूरी योजना प्रभावित हुई और अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ा। ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक है।


