CG PM Awas Yojana : सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत घर बनाने वाले पात्र हितग्राहियों के लिए राहत भरी खबर है। अब योजना के पात्र हितग्राही अपने आवास निर्माण के लिए निःशुल्क रेत प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए जिला प्रशासन ने ई-रेत संगवारी मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। राज्य शासन के निर्देशानुसार शुरू की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को निर्माण सामग्री आसानी से उपलब्ध कराना है। इससे मकान निर्माण में होने वाली परेशानी कम होगी और रेत वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
पीएम आवास के हितग्राहियों को मिलेगी निःशुल्क रेत
राज्य शासन के निर्देश पर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला प्रशासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के पात्र हितग्राहियों को रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। इसके तहत जिन हितग्राहियों को योजना के अंतर्गत आवास निर्माण की स्वीकृति मिली है, वे निर्धारित नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार निःशुल्क रेत प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
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इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मकान निर्माण में मदद मिलेगी। अक्सर रेत की उपलब्धता और उसकी कीमत के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आवास निर्माण प्रभावित होता है। शासन की इस व्यवस्था से हितग्राहियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
ई-रेत संगवारी एप से करना होगा ऑनलाइन आवेदन
निःशुल्क रेत प्राप्त करने के लिए हितग्राहियों को ई-रेत संगवारी मोबाइल एप का इस्तेमाल करना होगा। एप के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा दी गई है। आवेदन मिलने के बाद नियमानुसार उसकी प्रक्रिया पूरी की जाएगी और पात्र हितग्राहियों को रेत उपलब्ध कराई जाएगी।
इस डिजिटल व्यवस्था से लोगों को आवेदन के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही आवेदन और वितरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने में भी मदद मिलेगी।
रेत वितरण में पारदर्शिता लाना मुख्य उद्देश्य
जिला प्रशासन के अनुसार इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत मकानों का निर्माण समय पर पूरा कराने में सहयोग करना है। इसके अलावा रेत की उपलब्धता को सुगम बनाना और वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना भी प्राथमिकता है।
ऑनलाइन आवेदन प्रणाली से पात्र हितग्राहियों की जानकारी व्यवस्थित तरीके से दर्ज की जा सकेगी। इससे रेत वितरण में अनियमितताओं की आशंका कम करने में मदद मिलेगी।


