BREAKING NEWS : काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ऊंचाई वाले क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने की घटना ने भारी तबाही मचा दी। बुधवार को ग्लेशियर का करीब दो-तिहाई हिस्सा टूटकर ल्हेंडे खोला नदी के जलग्रहण क्षेत्र में लगभग 1.2 किलोमीटर नीचे जा गिरा। वैज्ञानिकों और सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से सामने आया है कि इस घटना के बाद पहाड़ी इलाके में एक के बाद एक घटनाओं की श्रृंखला शुरू हुई, जिसने अचानक बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए।
सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आई घटना
वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा ऊंचाई से टूटकर नीचे गिरा। इसके साथ बर्फ, चट्टान, मलबा और पानी तेजी से नीचे की ओर बढ़ा। सैटेलाइट तस्वीरों में घटना से पहले और बाद के इलाके में बड़ा बदलाव दिखाई दिया है। शुरुआती विश्लेषण से संकेत मिलता है कि ग्लेशियर का लगभग दो-तिहाई हिस्सा अपनी जगह से खिसक गया।
‘लिक्विड कंक्रीट’ जैसा बना मलबे का सैलाब
ग्लेशियर के टूटने के बाद नीचे की ओर बढ़ा मलबा सामान्य बाढ़ से कहीं ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। बर्फ और चट्टानों के साथ पानी और महीन तलछट मिलकर बेहद घना मिश्रण बन गया। वैज्ञानिकों ने इसकी तुलना ‘लिक्विड कंक्रीट’ से की है। इस तरह का तेज और भारी प्रवाह रास्ते में आने वाली जमीन, पुलों, सड़कों और अन्य संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
चेन रिएक्शन से बढ़ी तबाही
विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल ग्लेशियर टूटने की एक घटना नहीं थी। ग्लेशियर के बड़े हिस्से के नीचे गिरने से नदी के जलग्रहण क्षेत्र में मलबा जमा हुआ और पानी का प्रवाह अचानक बदल गया। इसके बाद मलबे और पानी का तेज बहाव निचले इलाकों की तरफ बढ़ा। इसी चेन रिएक्शन ने नुकसान को और गंभीर बना दिया।
ऊंचाई वाले इलाकों में बढ़ रहा खतरा
हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों और बर्फ की संरचनाओं में होने वाले बदलाव वैज्ञानिकों के लिए लगातार चिंता का विषय हैं। तापमान में बदलाव, ग्लेशियरों का पीछे हटना और पहाड़ी ढलानों की अस्थिरता अचानक बाढ़ तथा भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ा सकती है।


