रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के 11वें दिन प्रश्नकाल के दौरान कोरबा जिले में हुए अमानक चावल खरीदी के मामले ने सदन का पारा चढ़ा दिया। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सदन में स्वीकार किया कि जिले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। इस मामले में शासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 26 राइस मिलों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है और जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश जारी किया है।
करोड़ों का फेरबदल: अमानक चावल की एंट्री
प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक व्यास कश्यप के सवाल का जवाब देते हुए खाद्य मंत्री ने बताया कि कोरबा के नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं।
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ID का गलत इस्तेमाल: जांच में खुलासा हुआ कि कोरबा में चावल के उठाव के लिए बालोद, बेमेतरा और जशपुर के कर्मचारियों की लॉगिन आईडी (ID) का अवैध रूप से उपयोग किया गया था।
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वितरण के लायक नहीं था चावल: गोदामों में जमा किए गए कुल चावल में से 8,153 क्विंटल चावल ‘अमानक’ (घटिया स्तर का) पाया गया, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए जनता को बांटने योग्य नहीं था।
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घोटाले की राशि: इस खराब चावल की कुल कीमत लगभग 3 करोड़ 34 लाख रुपये आंकी गई है।
कड़ी कार्रवाई: किन पर गिरी गाज?
मामले की पुष्टि होने के बाद खाद्य विभाग ने निम्नलिखित अनुशासनात्मक कार्रवाई की है:
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अधिकारियों का निलंबन: जिला विपणन अधिकारी (DMO) प्रमोद जांगड़े और उनके साथ एक अन्य कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
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मिलरों पर बैन: घोटाले में शामिल 26 राइस मिलों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। अब ये मिलें भविष्य में सरकारी धान का उठाव या कस्टम मिलिंग नहीं कर सकेंगी।
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वसूली के निर्देश: अमानक चावल के कारण हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए संबंधित मिलरों और अधिकारियों से वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
विपक्ष का तीखा हमला
विधायक व्यास कश्यप ने इस मामले को लेकर सरकार को घेरा और सवाल किया कि दूसरे जिलों के अधिकारियों की आईडी का इस्तेमाल कोरबा में कैसे संभव हुआ? उन्होंने इसे एक बड़े संगठित भ्रष्टाचार का हिस्सा बताया। मंत्री बघेल ने आश्वस्त किया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जो भी अन्य नाम सामने आएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।



