कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारी गई महिला नक्सली कमांडर रूपी का अंतिम संस्कार अब बड़े विवाद का केंद्र बन गया है। तेलंगाना के मेडक जिले में आयोजित इस अंतिम संस्कार के दौरान समर्थकों द्वारा लाल झंडे लहराने और विवादित ‘हिडमा गाना’ गाकर उसे शहीद के रूप में विदाई देने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस घटनाक्रम ने सुरक्षा एजेंसियों को सकते में डाल दिया है, क्योंकि इसमें खुलेआम प्रतिबंधित विचारधारा का महिमामंडन किया गया है।
मुठभेड़ से लेकर अंतिम संस्कार तक का घटनाक्रम
नक्सली कमांडर रूपी छत्तीसगढ़ के कांकेर के जंगलों में एक बड़े सर्च ऑपरेशन के दौरान मारी गई थी। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसके शव को परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद उसका पैतृक निवास तेलंगाना ले जाया गया। विवाद तब शुरू हुआ जब अंतिम विदाई के दौरान भीड़ ने नक्सली गीतों और नारों का सहारा लिया।
वायरल वीडियो और विवाद की वजहें
सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो में कई गंभीर बातें सामने आई हैं, जिन्होंने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं:
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लाल झंडों का प्रदर्शन: अंतिम संस्कार में शामिल भीड़ ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन के प्रतीक लाल झंडों का उपयोग किया।
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हिडमा गाना: कुख्यात नक्सली नेता हिडमा के नाम पर बने भड़काऊ गाने गाए गए, जो सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसा को प्रेरित करते हैं।
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शहीद का दर्जा: सुरक्षा बलों की गोलियों से मारी गई नक्सली कमांडर रूपी को एक क्रांतिकारी शहीद के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई।
सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता
इस वायरल वीडियो के बाद खुफिया विभाग और स्थानीय पुलिस अलर्ट पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह का प्रदर्शन नक्सली विचारधारा को फिर से जीवित करने का एक संगठित प्रयास हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियां अब वीडियो की पड़ताल कर रही हैं ताकि उन चेहरों की पहचान की जा सके जिन्होंने इस भड़काऊ कार्यक्रम का नेतृत्व किया।



