छत्तीसगढ़ शासन द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के आवासों के विक्रय के संबंध में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के सकारात्मक परिणाम अब प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई देने लगे हैं। लंबे समय से रिक्त आवासों को पात्र हितग्राहियों के अतिरिक्त अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को भी विक्रय करने तथा बल्क परचेस की अनुमति मिलने से आवासीय योजनाओं को नई गति मिल रही है। इससे जहां निर्मित भवनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो रहा है, वहीं शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी संस्थाओं को अपने कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने का अवसर भी मिल रहा है।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल द्वारा संचालित आवासीय योजनाओं में बल्क परचेस के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न शहरों में आवासों का विक्रय किया गया है। दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर एवं रायगढ़ में जीएसटी विभाग द्वारा कुल 68 आवासों का क्रय किया गया है। इनमें दुर्ग में 24 मकान लगभग 6.50 करोड़ रुपये, जगदलपुर में 16 मकान लगभग 6 करोड़ रुपये, बिलासपुर में 25 मकान लगभग 10.35 करोड़ रुपये तथा रायगढ़ में 3 मकान लगभग 92 लाख रुपये की राशि से क्रय किए गए हैं। इन आवासों की कुल संख्या 68 है तथा इनका कुल मूल्य लगभग 23.77 करोड़ रुपये है।
इसी क्रम में नवा रायपुर अटल नगर में प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मेफेयर संस्था द्वारा 128 मकान लगभग 16.20 करोड़ रुपये में क्रय किए गए हैं। वहीं, मैट्स विश्वविद्यालय द्वारा आरंग में 30 मकान लगभग 2.2 करोड़ रुपये की राशि से क्रय किए गए हैं। इसके अतिरिक्त नवा रायपुर में विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय द्वारा भी 128 फ्लैट्स की बल्क खरीदी का निर्णय लिया गया है, जिनका कुल मूल्य लगभग 16 करोड़ 20 लाख रुपये बताया गया है।
इस प्रकार प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संस्थाओं द्वारा बल्क परचेस के माध्यम से आवास क्रय करने की पहल से आवासीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और निर्मित भवनों के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही, संस्थाओं को अपने कर्मचारियों की आवासीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यवस्थित आवास उपलब्ध कराने में सुविधा हो रही है।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल द्वारा नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-16, 30 एवं 34 में प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) एवं निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए आवासों का निर्माण किया गया है। योजना के प्रथम चरण में कुल 6,296 भवनों का क्रियान्वयन किया गया था। निर्मित आवासों के विक्रय के लिए लगातार विज्ञापन जारी किए जाने के बावजूद कुछ भवन लंबे समय तक रिक्त रहे। इससे भवनों की सुरक्षा एवं रखरखाव संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं और मण्डल के वित्तीय संसाधनों पर भी प्रभाव पड़ रहा था।
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य मंत्रिपरिषद् ने 14 नवंबर 2025 को महत्वपूर्ण निर्णय लिया कि तीन बार विज्ञापन जारी होने के बाद भी अविक्रित रहने वाले आवासों को पात्र हितग्राहियों के अतिरिक्त अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को भी विक्रय किया जा सकेगा। ऐसे क्रेताओं को शासन द्वारा प्रदत्त अनुदान का लाभ नहीं दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल के माननीय अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने कहा कि राज्य शासन का यह निर्णय दूरदर्शिता और जनहित का अच्छा उदाहरण है। किसी भी आवासीय योजना की वास्तविक सफलता तभी है, जब निर्मित आवासों का उपयोग हो और उनमें लोगों की बसाहट हो। लंबे समय तक खाली पड़े भवनों की सुरक्षा, रखरखाव और मण्डल के वित्तीय संसाधनों के समुचित उपयोग को ध्यान में रखते हुए शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसका लाभ अब प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।
अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना को लेकर यह स्पष्ट किया कि EWS एवं LIG वर्ग के पात्र हितग्राहियों को योजना के अंतर्गत निर्धारित शासकीय एवं केंद्रीय अनुदान का लाभ पूर्ववत मिलता रहेगा। वहीं, अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को अनुदान के बिना आवास क्रय करने का अवसर मिल रहा है।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण ने बताया कि प्रदेश में विभिन्न संस्थाओं द्वारा बल्क परचेस के प्रति रुचि दिखाई जा रही है। जीएसटी विभाग द्वारा दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर एवं रायगढ़ में आवासों का क्रय किया जाना तथा मेफेयर और मैट्स विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं द्वारा भी आवास खरीदा जाना इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय द्वारा नवा रायपुर में 128 फ्लैट्स की बल्क खरीदी का निर्णय भी संस्थागत मांग और शासन की नीति के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि मण्डल द्वारा आवासों का विक्रय निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन ऑफर के माध्यम से किया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का ध्यान रखा जा रहा है, जिससे इच्छुक व्यक्तियों एवं संस्थाओं को समान अवसर मिल सके।


