Tiger Shroff Firing Case : कोटा। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर मुंबई में फायरिंग कर फरार हुए शूटरों को पकड़ने के लिए पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की थी। मामले में कोटा पुलिस की भूमिका चर्चा में है। जानकारी के मुताबिक, फायरिंग के बाद भाग रहे आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस जवान यात्री बनकर ट्रेन में पहुंचे। सीसीटीवी फुटेज की मदद से संदिग्धों की पहचान की गई और इसके बाद उन्हें ट्रेन के भीतर ही पकड़ लिया गया। बताया जा रहा है कि पुलिस ने महज पांच मिनट के भीतर आरोपियों को दबोच लिया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को पीछे के रास्ते से बाहर निकाला गया, ताकि उन्हें सुरक्षित तरीके से पुलिस की निगरानी में ले जाया जा सके।
मुंबई में फायरिंग के बाद फरार हुए थे शूटर
मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग की घटना के बाद आरोपियों के फरार होने की खबर सामने आई थी। इस मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती संदिग्धों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द पकड़ने की थी।
फायरिंग के बाद आरोपियों की गतिविधियों और उनके संभावित भागने के रास्तों पर नजर रखी गई। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज महत्वपूर्ण साबित हुआ, जिसके जरिए संदिग्धों की पहचान करने में मदद मिली।
यात्री बनकर ट्रेन में पहुंचे पुलिस जवान
आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने रणनीति के तहत कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि पुलिस जवान सामान्य यात्रियों की तरह ट्रेन में पहुंचे, ताकि संदिग्धों को कार्रवाई का अंदाजा न लग सके।
इस दौरान पुलिस ने संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी। जैसे ही उनकी पहचान सुनिश्चित हुई, जवानों ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ लिया। इस रणनीति से आरोपियों को भागने का मौका नहीं मिला।
CCTV फुटेज से हुई संदिग्धों की पहचान
इस पूरे घटनाक्रम में सीसीटीवी फुटेज की अहम भूमिका बताई जा रही है। फुटेज के जरिए संदिग्धों की पहचान करने और उनकी गतिविधियों को समझने में पुलिस को मदद मिली।
जांच में तकनीकी साक्ष्यों और पुलिस टीम के समन्वय का महत्व सामने आया। हालांकि, आरोपियों की पहचान किस फुटेज से हुई और गिरफ्तारी के दौरान कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे, इसकी विस्तृत जानकारी आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट हो सकेगी।


