जगदलपुर/बीजापुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। नक्सलियों के ठिकाने (डंप) से पुलिस ने 3 करोड़ 61 लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी और 1 किलो शुद्ध सोना बरामद किया है। बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने इस बरामदगी का खुलासा करते हुए बताया कि यह पैसा नक्सलियों ने ग्रामीणों और व्यापारियों से ‘टैक्स’ के नाम पर डरा-धमका कर वसूला था।
कैसे हुआ खुलासा?
यह बड़ी सफलता 11 मार्च को जगदलपुर में हुए ऐतिहासिक 108 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद मिली लीड के आधार पर प्राप्त हुई है।
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बीजापुर में कार्रवाई: आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों से पूछताछ के दौरान बीजापुर जिले के जंगलों में छिपाए गए गुप्त ठिकानों की जानकारी मिली।
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जमीन में दफन था खजाना: सुरक्षाबलों ने जब चिह्नित स्थानों पर खुदाई की, तो प्लास्टिक के ड्रमों में भरकर जमीन के नीचे छिपाए गए नोटों के बंडल और सोना बरामद हुआ।
आईजी बस्तर के खुलासे की 5 बड़ी बातें:
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गरीबों का पैसा: आईजी ने स्पष्ट किया कि यह पैसा नक्सलियों का नहीं, बल्कि बस्तर के उन गरीब ग्रामीणों का है जिनसे लेवी और टैक्स के नाम पर जबरन वसूली की गई थी।
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विकास में बाधा: नक्सलियों द्वारा जमा किए गए इस ‘ब्लैक मनी’ का इस्तेमाल हथियार खरीदने, आईईडी (IED) बनाने और विकास कार्यों को रोकने के लिए किया जाना था।
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संगठनात्मक दरार: आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों ने बताया कि शीर्ष नेता तो ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं, जबकि निचले स्तर के लड़ाकों और ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसाया जाता है।
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सोने की ईंटें: बरामद 1 किलो सोना भी लेवी के रूप में बड़े ठेकेदारों या कारोबारियों से वसूले जाने की आशंका है।
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आगे की जांच: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन पैसों को सफेद करने में किन-किन सफेदपोशों या नेटवर्क की मदद ली जा रही थी।



