नई दिल्ली: Modi Cabinet Expansion 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के तीसरे कार्यकाल को करीब ढाई साल पूरे होने वाले हैं। इस दौरान कई मंत्री मंत्रिपरिषद से बाहर हो चुके हैं। मौजूदा स्थिति में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 मंत्रियों की जगह हो सकती है, जबकि अभी 68 मंत्री ही सरकार में हैं। ऐसे में मंत्रिपरिषद में 13 पद खाली हैं। कई कैबिनेट मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालयों की जिम्मेदारी है। इसी वजह से संसद के आगामी शीतकालीन सत्र से पहले मोदी कैबिनेट विस्तार और फेरबदल की अटकलें तेज हो गई हैं।
40 फीसदी कैबिनेट मंत्रियों के पास कई मंत्रालय
मौजूदा समय में करीब 40 फीसदी कैबिनेट मंत्री एक से ज्यादा मंत्रालयों का काम संभाल रहे हैं। इनमें अमित शाह, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, निर्मला सीतारमण, मनोहर लाल खट्टर, अश्विनी वैष्णव, प्रह्लाद जोशी और जी किशन रेड्डी जैसे नाम शामिल हैं।
दो कैबिनेट मंत्रियों के पास तीन-तीन बड़े मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी है। इससे सरकार में कुछ मंत्रियों पर काम का अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। ऐसे में नए चेहरों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने और कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
मोदी कैबिनेट में अभी 68 मंत्री
केंद्रीय मंत्रिपरिषद में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं। मौजूदा समय में मोदी सरकार में 29 कैबिनेट मंत्री, 5 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 34 राज्यमंत्री हैं। इस तरह कुल 68 मंत्री ही सरकार का हिस्सा हैं।
अधिकतम निर्धारित संख्या के मुकाबले अभी 13 पद खाली हैं। अगर हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा भी मंत्री पद से बाहर होते हैं, तो मंत्रियों की संख्या 66 रह जाएगी। ऐसी स्थिति में सरकार को मंत्रिपरिषद में और नए चेहरों को शामिल करने की जरूरत पड़ सकती है।
हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा पर भी नजर
बीजेपी ने सोमवार को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम घोषित किए। इस सूची में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और राज्यमंत्री बीएल वर्मा का नाम नहीं है। ऐसे में उनके अगले महीने राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के बाद मंत्री पद छोड़ने की संभावना जताई जा रही है।
इससे पहले जून में रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को बीजेपी ने दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा था। इसके बाद दोनों को मंत्री पद छोड़ना पड़ा था।
शीतकालीन सत्र से पहले हो सकता है कैबिनेट विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत जून 2024 में हुई थी। सरकार अब अपने कार्यकाल का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर चुकी है। ऐसे में लंबे समय से खाली पदों और मंत्रियों पर बढ़े काम के बोझ को देखते हुए कैबिनेट विस्तार की संभावना बढ़ गई है।
माना जा रहा है कि नवंबर-दिसंबर में होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र से पहले मोदी मंत्रिपरिषद में विस्तार या बड़ा फेरबदल किया जा सकता है। इसमें कुछ नए चेहरों को जगह मिलने के साथ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव संभव है।
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यूपी और पंजाब चुनावों का दिख सकता है असर
आगामी विधानसभा चुनाव भी संभावित कैबिनेट विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। खासतौर पर उत्तर प्रदेश और पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर नए चेहरों को मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश से कुछ और नेताओं को केंद्र में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं पंजाब में आगामी चुनाव को देखते हुए किसी सिख नेता को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाने की अटकलें भी हैं।
इसके अलावा मौजूदा मंत्रिपरिषद में मुस्लिम और ईसाई समुदाय का कोई चेहरा नहीं है। हरदीप सिंह पुरी के बाहर होने की स्थिति में सिख प्रतिनिधित्व भी खत्म हो सकता है। ऐसे में संभावित विस्तार में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधने पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
नए चेहरों के साथ मंत्रालयों में बदलाव संभव
कैबिनेट विस्तार होने की स्थिति में केवल खाली पदों को भरने तक ही बदलाव सीमित रहने की संभावना नहीं है। सरकार कुछ मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी कर सकती है। जिन मंत्रियों के पास कई मंत्रालय हैं, उनके अतिरिक्त प्रभार को कम करने के लिए नए मंत्रियों को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
हालांकि, कैबिनेट विस्तार की तारीख को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। फिलहाल यह राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर लगाई जा रही संभावनाओं पर आधारित चर्चा है।


