स्नेक बाइट मुआवजा घोटाला : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सामने आए फर्जी सर्पदंश (स्नेक बाइट) मुआवजा घोटाले में जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। इस बहुचर्चित मामले में अब तक दो आरक्षकों सहित कुल 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में डॉक्टर, पुलिसकर्मी, वकील, तहसील कार्यालय के कर्मचारी और बिचौलियों का संगठित नेटवर्क सामने आया है।
ताजा कार्रवाई में पुलिस ने सिम्स अस्पताल पुलिस चौकी में पदस्थ आरक्षक रामकुमार पाटनवार और रामेश्वर भास्कर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों अस्पताल में शव आने की सूचना कथित हीरा खांडे गिरोह तक पहुंचाते थे।
ऐसे काम करता था पूरा गिरोह
पुलिस जांच के अनुसार, सिम्स अस्पताल से शुरू होकर तहसील कार्यालय तक फैले इस नेटवर्क में शव अस्पताल पहुंचते ही पुलिसकर्मी गिरोह के सदस्य महेंद्र मनहर को सूचना देते थे। इसके बाद गिरोह के सदस्य मृतकों के परिजनों से संपर्क कर उन्हें सरकारी मुआवजा दिलाने का लालच देते थे।
जांच में सामने आया है कि सामान्य बीमारी, कैंसर, आत्महत्या या अन्य कारणों से हुई मौतों को दस्तावेजों में सर्पदंश से हुई मौत दर्शाया जाता था। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकार से मिलने वाली आपदा राहत राशि स्वीकृत कराई जाती थी और उसका हिस्सा गिरोह तथा कुछ मामलों में परिजनों के बीच बांटा जाता था।
फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खेल
पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र में जहर खाने से हुई एक मौत को सर्पदंश बताकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का पहला मामला सामने आया था। इस मामले में डॉक्टर, मृतक के परिजन और एक अधिवक्ता के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी।
जांच के दौरान एसडीएम कार्यालय और तहसील कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई, जिसके बाद संबंधित कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया गया।
अब तक 19 आरोपी गिरफ्तार
अब तक गिरफ्तार आरोपियों में बिचौलिए, डॉक्टर, अधिवक्ता, पुलिसकर्मी और राजस्व विभाग के कर्मचारी शामिल हैं। ताजा गिरफ्तारी के बाद इस मामले में कुल 19 आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।
लिपिक कर्मचारी संघ ने जताया विरोध
लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने तहसील और एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों की गिरफ्तारी का विरोध किया है। संघ का कहना है कि सर्पदंश मुआवजा प्रकरण में कार्रवाई एक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत होती है, जिसमें पुलिस पंचनामा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पटवारी प्रतिवेदन के बाद सक्षम राजस्व अधिकारी निर्णय लेते हैं। कर्मचारियों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
विधानसभा में भी गूंजा था मामला
यह मामला हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में भी उठा था। चर्चा के दौरान बताया गया कि जशपुर जिले में तीन वर्षों में सर्पदंश से 96 मौतें दर्ज हुईं, जबकि अकेले बिलासपुर में 431 मौतें दिखाकर 17.24 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया।
इस मुद्दे को बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाया था। इसके बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था।


