जब सांसें रोक देने वाला मुकाबला हुआ टाई
इस ऐतिहासिक मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 141 रन बनाए थे। जवाब में उतरी पाकिस्तान की टीम भी निर्धारित 20 ओवरों में 9 विकेट खोकर 141 रन ही बना सकी। मैच की आखिरी गेंद पर पाकिस्तान को जीत के लिए 1 रन चाहिए था, लेकिन मिसबाह-उल-हक रन आउट हो गए। नतीजा यह हुआ कि मुकाबला टाई हो गया। उस समय ‘सुपर ओवर’ का नियम नहीं था, इसलिए मैच का फैसला करने के लिए फुटबॉल की तर्ज पर बॉल आउट का सहारा लिया गया।
बॉल आउट: सहवाग, भज्जी और उथप्पा का सटीक निशाना
बॉल आउट में दोनों टीमों के गेंदबाजों को बिना बल्लेबाज के स्टंप्स पर निशाना साधना था। कप्तान एमएस धोनी ने एक चतुर चाल चली और नियमित गेंदबाजों के बजाय उन खिलाड़ियों को चुना जिनका निशाना सटीक था। भारत की ओर से वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह और रॉबिन उथप्पा ने एक के बाद एक लगातार तीन गेंदों पर स्टंप्स उड़ा दिए। दूसरी ओर, पाकिस्तान के यासिर अराफात, उमर गुल और शाहिद अफरीदी तीनों ही स्टंप्स पर गेंद मारने में विफल रहे। भारत ने यह बॉल आउट 3-0 से जीतकर इतिहास रच दिया।
“बॉल आउट के लिए हमने प्रैक्टिस की थी। धोनी स्टंप्स के बिल्कुल पीछे घुटने टेक कर खड़े थे ताकि गेंदबाजों को निशाना लगाने में आसानी हो। यह पूरी तरह से टीम वर्क और सटीक रणनीति का नतीजा था।”
— रॉबिन उथप्पा, पूर्व भारतीय क्रिकेटर (मैच के संस्मरणों से)


