Hum Vatan News
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश – विदेश
  • उद्योग
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Reading: अंटार्कटिका में बर्फ की मोटी चादर के नीचे क्या दबा है, जानना नहीं चाहेंगे आप
Font ResizerAa
Hum Vatan NewsHum Vatan News
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश – विदेश
  • उद्योग
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश – विदेश
  • उद्योग
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.

Home » अंटार्कटिका में बर्फ की मोटी चादर के नीचे क्या दबा है, जानना नहीं चाहेंगे आप

Featuredदेश - विदेश

अंटार्कटिका में बर्फ की मोटी चादर के नीचे क्या दबा है, जानना नहीं चाहेंगे आप

Hum Vatan News
Last updated: May 15, 2025 4:58 PM
By
Hum Vatan News
Share
SHARE
× Popup Image

सिडनी: क्या आपने कभी सोचा है कि बर्फ की मोटी चादर के नीचे का अंटार्कटिका कैसा दिखता है? नीचे ऊबड़-खाबड़ पहाड़, घाटियां और मैदान छिपे हुए हैं। ट्रांसअंटार्कटिक पर्वत जैसे विशाल पहाड़ बर्फ की चादर के ऊपर दिखाई देते हैं, जबकि पूर्वी अंटार्कटिका के बीचों बीच स्थित प्राचीन गम्बुर्त्सेव सबग्लेशियल पर्वत पूरी तरह से बर्फ के नीचे दबे हुए हैं। गम्बुर्त्सेव पर्वत आकार और फैलाव के मामले में यूरोपीय आल्प्स के समान हैं। हालांकि, हम उन्हें नहीं देख सकते, क्योंकि ऊंची अल्पाइन चोटियां और गहरी हिमनदी घाटियां बर्फ की कई किलोमीटर मोटी परत के नीचे दबी हुई हैं।

Contents
गम्बुर्त्सेव पर्वत कैसे अस्तित्व में आया? सोवियत दल ने अस्तित्व से उठाया पर्दा मिल रहे हैं सवालों के जवाब‘टाइम कैप्सूल’ से हो रहा समय का आकलनखुल रहे हैं बर्फ के नीचे दबे रहस्य

गम्बुर्त्सेव पर्वत कैसे अस्तित्व में आया? 

आमतौर पर कोई पर्वत शृंखला उन जगहों पर उभरती है, जहां दो टेक्टॉनिक प्लेट आपस में टकराती हैं। लेकिन पूर्वी अंटार्कटिका तो लाखों वर्षों से टेक्टॉनिक रूप से स्थिर है। ‘अर्थ एंड प्लेनेटरी साइंस लेटर्स’ पत्रिका में प्रकाशित नए अध्ययन से पता चलता है कि बर्फ की मोटी चादर के नीचे दबी यह विशाल पर्वत शृंखला 50 करोड़ साल से भी अधिक समय पहले अस्तित्व में आई थी, जब टेक्टॉनिक प्लेट की टक्कर से वृहत महाद्वीप (सुपरकॉन्टिनेंट) गोंडवाना तैयार हुआ था। अध्ययन से इस बारे में नई जानकारी हासिल होती है कि अलग-अलग भूगर्भिक काल में पहाड़ और महाद्वीप कैसे विकसित हुए। इससे यह भी समझने में मदद मिलती है कि अंटार्कटिका का आंतरिक हिस्सा करोड़ों वर्षों से उल्लेखनीय रूप से स्थिर क्यों रहा है।

- Advertisement -
HTML5 Icon

सोवियत दल ने अस्तित्व से उठाया पर्दा 

गम्बुर्त्सेव पर्वत शृंखला पूर्वी अंटार्कटिका में बर्फ की चादर के सबसे ऊंचे बिंदु के नीचे दबी हुई है। सबसे पहले 1958 में एक सोवियत दल ने भूकंपीय तकनीकों की मदद से इसके अस्तित्व से पर्दा उठाया था। चूंकि, यह पर्वत शृंखला पूरी तरह से बर्फ से ढकी हुई है, इसलिए यह पृथ्वी की उन टेक्टोनिक विशेषताओं में से एक है, जिनके बारे में ज्यादा समझ नहीं हासिल की जा सकी है। वैज्ञानिकों के लिए यह बहुत ही रहस्यमयी प्रवृत्ति की है।

- Advertisement -
HTML5 Icon

मिल रहे हैं सवालों के जवाब

एक प्राचीन, स्थिर महाद्वीप के हृदय में इतनी विशाल पर्वत शृंखला आखिर कैसे तैयार हुई और इसका अस्तित्व अभी तक कैसे बरकरार है? तो इसका जवाब यह है कि ज्यादातर प्रमुख पर्वत शृंखलाएं टेक्टॉनिक टकराव वाली जगहों को चिह्नित करती हैं। मिसाल के तौर पर हिमालय अभी भी बढ़ रहा है, क्योंकि भारतीय और यूरेशियन प्लेट लगातार एक-दूसरे की तरफ बढ़ रही हैं। लगभग पांच करोड़ साल पहले शुरू हुई इस प्रक्रिया के कारण हिमालय की ऊंचाई में हर साल कुछ मिलीमीटर की वृद्धि दर्ज की जाती है। प्लेट टेक्टॉनिक मॉडल बताते हैं कि पूर्वी अंटार्कटिका की मौजूदा भूपर्पटी 70 करोड़ साल से भी अधिक समय पहले, कम से कम दो बड़े महाद्वीप के करीब आने से तैयार हुई थी। ये महाद्वीप एक विशाल महासागरीय बेसिन से बंटे हुए थे। इन विशाल भूखंडों के टकराव से गोंडवाना का जन्म हुआ, जो एक ऐसा वृहत महाद्वीप था, जिसमें मौजूदा अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत और अंटार्कटिका शामिल थे। नया अध्ययन इस विचार का समर्थन करता है कि गम्बुर्त्सेव पर्वत इन प्राचीन महाद्वीपों के बीच हुए टकराव के दौरान अस्तित्व में आए थे। इस टकराव ने पहाड़ों के नीचे गर्म, आंशिक रूप से पिघली हुई चट्टान के प्रवाह को गति दी। पर्वत निर्माण के दौरान भूपर्पटी धीरे-धीरे मोटी, गर्म और अस्थिर हो गई तथा अपने ही भार के कारण टूटने लगी। सतह के नीचे गर्म चट्टानें गुरुत्वाकर्षण प्रसार के तहत समानांतर दिशा में बहने लगीं, ठीक उसी तरह जैसे ट्यूब से टूथपेस्ट निकलता है। इससे पहाड़ आंशिक रूप से ढह गए, जबकि एक मोटी पर्पटी “जड़” बची रही, जो पृथ्वी के आवरण में समाई हुई है।

‘टाइम कैप्सूल’ से हो रहा समय का आकलन

 इस नाटकीय उभार और विध्वंस की अवधि का आकलन करने के लिए 25 करोड़ साल से भी अधिक समय पहले प्राचीन पर्वतों से बहने वाली नदियों के किनारे इकट्ठा होने वाले बलुआ पत्थरों में पाए जाने वाले सूक्ष्म ‘जिरकोन’ कणों का विश्लेषण किया गया। ये बलुआ पत्थर सैकड़ों किलोमीटर दूर बर्फ की मोटी परत से ढकी प्रिंस चार्ल्स पर्वतमाला से हासिल किए गए थे। ‘जिरकोन’ को अक्सर ‘टाइम कैप्सूल’ कहा जाता है, क्योंकि उनकी क्रिस्टल संरचना में बेहद कम मात्रा में यूरेनियम पाया जाता है। यूरेनियम में ज्ञात दर पर क्षय होता है, जिसके कारण वैज्ञानिक बहुत सटीकता से उनकी उम्र का निर्धारण कर पाते हैं। इन ‘जिरकोन’ कणों में पहाड़ों के निर्माण की अवधि दर्ज है।

खुल रहे हैं बर्फ के नीचे दबे रहस्य

गम्बुर्त्सेव पर्वत शृंखला लगभग 65 करोड़ साल पहले बननी शुरू हुई, करीब 58 करोड़ साल पहले उसने हिमालय जितनी ऊंचाई हासिल की और लगभग 50 करोड़ साल पहले भूपर्पटी पिघलने और चट्टानों के बहने की गवाह बनी। महाद्वीपीय टकरावों से निर्मित ज्यादातर पर्वत शृंखलाएं लगातार क्षरण के कारण अंतत: नष्ट हो जाती हैं। हालांकि, ये बाद में होने वाली टेक्टॉनिक घटनाओं के कारण फिर से आकार ले सकती हैं। चूंकि, गम्बुर्त्सेव सबग्लेशियल पर्वत बर्फ की मोटी चादर के नीचे दबे हुए हैं, इसलिए ये पृथ्वी पर सबसे अच्छी तरह से संरक्षित प्राचीन पर्वत शृंखलाओं में से एक हैं। अंटार्कटिका भूवैज्ञानिक अजूबों से भरा एक विशाल महाद्वीप है और इसकी बर्फ के नीचे दबे रहस्यों का खुलासा अभी शुरू ही हुआ है।

Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Copy Link Print
Advertisement Carousel

Latest Post

CG NEWS : नेपाल बाढ़ ने बढ़ाई छत्तीसगढ़ की चिंता, BJP नेता की बेटी सहित रायपुर-बिलासपुर की दो युवतियों से नहीं हो रहा संपर्क
Featured छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री निवास में रक्षाबंधन का आत्मीय उल्लास, विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचीं माताओं-बहनों ने मुख्यमंत्री को बांधी राखी.
अन्य छत्तीसगढ़ देश - विदेश
CG News : जेल की सलाखों के बीच सजा भाई-बहन के प्यार का रंग, छत्तीसगढ़ में कैदियों के साथ मनाया गया रक्षाबंधन
Featured छत्तीसगढ़
नेपाल से लौटे CM Sai का बड़ा बयान, बोले- छत्तीसगढ़ के भी कुछ लोग लापता’ सरकार कर रही तलाश
Featured छत्तीसगढ़
CG News : प्रेमी को बुलाने मोबाइल टावर पर चढ़ी नाबालिग, घंटों चला हाईवोल्टेज ड्रामा’ पुलिस ने सुरक्षित उतारा
Featured छत्तीसगढ़
CG Forest Guard Exam : वनरक्षक के 1484 पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज, 13 दिसंबर को होगी लिखित परीक्षा
Featured job छत्तीसगढ़
Raksha Bandhan’ पर शुभ मुहूर्त को लेकर न हों कंफ्यूज, पहले मुहूर्त के बाद अभिजीत काल में भी बांध सकती हैं राखी
Featured religion
Maruti Baleno Sigma EMI
Maruti Baleno Sigma EMI: ₹2 लाख Down Payment के बाद हर महीने कितनी बनेगी किस्त? समझें पूरा गणित
automobile

You Might Also Like Related

Featuredदेश - विदेश

BREAKING NEWS : नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटा, 1.2 KM नीचे आया बर्फीला मलबा’ नदी में आया भयानक उफान

By
Hum Vatan News
3 Min Read
CG Weather Update
Featuredछत्तीसगढ़

CG Weather Today : प्रदेश में बदला मौसम, 29 अगस्त से 2 सितंबर तक बारिश के आसार

By
Hum Vatan News
3 Min Read
Featuredreligion

28 August 2026 Horoscope : शुक्रवार को है श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि, जानिए अपना राशिफल

By
Hum Vatan News
3 Min Read
Previous Next
Hum Vatan News

Categories

  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश – विदेश
  • उद्योग
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

Follow for More

Quick Links

  • Privacy Policy
  • Contact
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31  
« Jul    

Hum Vatan News. Nimble Technology Design Company. All Rights Reserved.

Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?