छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी एवं माननीय आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी जी के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा आवासों की बल्क परचेस को प्रोत्साहित करने के संबंध में प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया गया। शासन द्वारा इस दिशा में 14 नवंबर 2025 में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय के सकारात्मक परिणाम वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दे रहे हैं।
इस निर्णय से मंडल के लंबे समय से रिक्त पड़े आवासों के बेहतर उपयोग के साथ-साथ शासकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी संस्थाओं को अपने कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने का अवसर भी मिल रहा है।
शासकीय विभागों को अपने कर्मचारियों के लिए आवासों का निर्माण कराने में भूमि की उपलब्धता, निर्माण प्रक्रिया, समय एवं वित्तीय संसाधनों जैसी विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा बल्क परचेस की व्यवस्था को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया। इसके माध्यम से विभाग एवं संस्थाएं छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के निर्मित तथा निर्माणाधीन मकानों की निर्धारित प्रक्रिया एवं शर्तों के अनुसार बल्क परचेस कर सकती हैं।
मंडल द्वारा संचालित आवासीय योजनाओं में बल्क परचेस के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न शहरों में आवासों का विक्रय किया जा रहा है। दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर एवं रायगढ़ में जीएसटी विभाग द्वारा कुल 68 आवासों का क्रय किया गया है। इनमें दुर्ग में 24 मकान लगभग 6.50 करोड़ रुपये, जगदलपुर में 16 मकान लगभग 6 करोड़ रुपये, बिलासपुर में 25 मकान लगभग 10.35 करोड़ रुपये तथा रायगढ़ में 3 मकान लगभग 92 लाख रुपये की राशि से क्रय किए गए हैं। इन 68 आवासों का कुल मूल्य लगभग 23.77 करोड़ रुपये है।
इसी क्रम में नवा रायपुर अटल नगर में प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मेफेयर संस्था द्वारा 128 मकान लगभग 16.20 करोड़ रुपये में क्रय किए गए हैं। वहीं, मैट्स विश्वविद्यालय द्वारा आरंग में 30 मकान लगभग 2.20 करोड़ रुपये में क्रय किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त नवा रायपुर में विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय द्वारा भी 128 फ्लैट्स की बल्क खरीदी का निर्णय लिया गया है, जिनका कुल मूल्य लगभग 16.20 करोड़ रुपये बताया गया है। विभिन्न संस्थाओं द्वारा आवासों की थोक खरीदी की दिशा में किए जा रहे प्रयास शासन की नीति के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाते हैं।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-16, 30 एवं 34 में प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) एवं निम्न आय वर्ग (LIG) के लिए आवासों का निर्माण किया गया है। योजना के प्रथम चरण में कुल 6,296 भवनों का क्रियान्वयन किया गया था। निर्मित आवासों के विक्रय के लिए लगातार विज्ञापन जारी किए जाने के बावजूद कुछ भवन लंबे समय तक रिक्त रहे। इससे भवनों की सुरक्षा एवं रखरखाव संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं और मंडल के वित्तीय संसाधनों पर भी प्रभाव पड़ रहा था।
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य मंत्रिपरिषद् ने 14 नवंबर 2025 को महत्वपूर्ण निर्णय लिया कि तीन बार विज्ञापन जारी होने के बाद भी अविक्रित रहने वाले आवासों को पात्र हितग्राहियों के अतिरिक्त अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को भी विक्रय किया जा सकेगा। ऐसे क्रेताओं को शासन द्वारा प्रदत्त अनुदान का लाभ नहीं दिया जाएगा। इस निर्णय से रिक्त आवासों की खरीदी के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं और वर्तमान में विभिन्न संस्थाओं द्वारा बल्क परचेस के माध्यम से आवास क्रय किए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के माननीय अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने कहा यह निर्णय दूरदर्शिता और जनहित का अच्छा उदाहरण है। किसी भी आवासीय योजना की वास्तविक सफलता तभी है, जब निर्मित आवासों का उपयोग हो और उनमें लोगों की बसाहट हो। लंबे समय तक खाली पड़े भवनों की सुरक्षा, रखरखाव और मंडल के वित्तीय संसाधनों के समुचित उपयोग को ध्यान में रखते हुए शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके सकारात्मक परिणाम वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दे रहे हैं।
अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री सह मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत EWS एवं LIG वर्ग के पात्र हितग्राहियों को निर्धारित शासकीय एवं केंद्रीय अनुदान का लाभ पूर्ववत मिलता रहेगा। वहीं, अन्य आय वर्ग के व्यक्तियों एवं संस्थाओं को निर्धारित शर्तों के अनुसार अनुदान के बिना आवास क्रय करने का अवसर मिल रहा है। इससे पात्र हितग्राहियों के हित सुरक्षित रहते हुए रिक्त भवनों के बेहतर उपयोग और संस्थागत सहभागिता को बढ़ावा मिल रहा है।
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल आयुक्त श्री अवनीश कुमार शरण ने बताया कि प्रदेश में विभिन्न संस्थाओं द्वारा बल्क परचेस के प्रति रुचि दिखाई जा रही है। जीएसटी विभाग द्वारा दुर्ग, जगदलपुर, बिलासपुर एवं रायगढ़ में आवासों का क्रय किया जाना तथा मेफेयर और मैट्स विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं द्वारा आवास खरीदा जाना इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय द्वारा नवा रायपुर में 128 फ्लैट्स की बल्क खरीदी का निर्णय भी संस्थागत मांग और शासन की नीति के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि मंडल द्वारा आवासों का विक्रय निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन ऑफर के माध्यम से किया जा रहा है। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का ध्यान रखा जा रहा है, जिससे इच्छुक व्यक्तियों एवं संस्थाओं को समान अवसर मिल सके। बल्क परचेस की व्यवस्था से वर्तमान में आवासीय संपत्तियों के उपयोग को बढ़ावा मिल रहा है और संस्थाओं को अपने कर्मचारियों की आवासीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए व्यवस्थित आवास उपलब्ध कराने में सुविधा हो रही है।
छत्तीसगढ़ शासन की इस पहल से प्रदेश में आवासीय योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने, रिक्त भवनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने, कर्मचारियों के लिए आवास उपलब्ध कराने तथा विभिन्न आवासीय कॉलोनियों में बसाहट बढ़ाने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी जी के निर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ाई गई यह पहल वर्तमान में शासन की आवासीय नीति को प्रभावी रूप से धरातल पर उतारने, संस्थागत आवश्यकताओं की पूर्ति करने और मंडल की आवासीय संपत्तियों का उपयोग सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


