पुणे में मौत का तांडव— पुणे और पिंपरी-चिंचवड औद्योगिक बेल्ट में पिछले तीन दिनों के भीतर जहरीली शराब (Hooch Tragedy) पीने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य गंभीर हालत में विभिन्न अस्पतालों में जीवन और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में अवैध शराब के स्टॉक में घातक औद्योगिक अल्कोहल ‘मेथेनॉल’ (Methanol) मिलाया गया था। इस भीषण कांड के बाद हरकत में आई पुलिस और राज्य आबकारी विभाग (State Excise Department) ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर मुख्य सरगना सहित 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने इस पूरे कांड की जांच तत्काल प्रभाव से राज्य अपराध जांच विभाग (CID) को सौंप दी है।

फुगेवाड़ी और हडपसर बने त्रासदी के मुख्य केंद्र
यह दर्दनाक घटनाक्रम बुधवार, 27 मई 2026 को शुरू हुआ, जब पिंपरी-चिंचवड के फुगेवाड़ी-दापोडी बेल्ट और पुणे शहर के हडपसर (पांढरे मला) और कालेपडल इलाके में कुछ स्थानीय मजदूरों ने अवैध अड्डों से लाकर शराब पी थी। शराब पीने के कुछ ही घंटों के भीतर पीड़ितों को धुंधला दिखने लगा, उल्टी और बेचैनी शुरू हो गई और कई लोगों के मुंह से झाग निकलने लगा।
पिंपरी-चिंचवड के यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल (YCM) अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, अधिकांश मरीजों को जब आपातकालीन वार्ड में लाया गया, तब वे गंभीर ‘एसिडोसिस’ (शरीर में अत्यधिक एसिड बनना) और सांस की विफलता से जूझ रहे थे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मृतकों में फुगेवाड़ी-दापोडी क्षेत्र के 10 लोग और हडपसर-कालेपडल क्षेत्र के 5 लोग शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि पहली 5 मौतें बुधवार को, 7 मौतें गुरुवार को और 3 मौतें शुक्रवार सुबह दर्ज की गईं। मृतकों की पहचान पांडुरंग फुगे (53), अकबर पठान (48), अरुण दादर (60) और अशोक चव्हाण (52) के रूप में हुई है।
मुंबई से लाया गया था केमिकल, हडपसर में तैयार हुई थी ‘मौत’
पुणे शहर के पुलिस आयुक्त (CP) अमितेश कुमार और पिंपरी-चिंचवड के संयुक्त पुलिस आयुक्त डॉ. बसवराज तेली के नेतृत्व में की गई जांच में इस पूरे रैकेट के कार्यप्रणाली (Modus Operandi) का खुलासा हुआ है। गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में मुख्य आपूर्तिकर्ता योगेश रामचंद्र वानखेड़े (23) और अवैध शराब का धंधा चलाने वाला कर्नल सिंह तख्तसिंह विर्का (73) शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ने गुरमंगत सिंह विर्का, राधेश्याम प्रजापति और आकाश जाधव नामक स्थानीय बूटलेगर को भी दबोचा है।
प्राथमिक जांच रिपोर्ट से पता चला है कि आरोपी योगेश वानखेड़े बिना किसी वैध परमिट के मुंबई से इंडस्ट्रियल मेथेनॉल लेकर आया था। उसने पुणे के हडपसर इलाके में स्थित एक आवासीय मकान के भीतर इस केमिकल को पानी और लोकल स्पिरिट में मिलाकर जहरीली शराब तैयार की। इसके बाद इस जानलेवा मिश्रण को पुणे और पिंपरी-चिंचवड की विभिन्न मलिन बस्तियों में सक्रिय चार छोटे खुदरा विक्रेताओं (वेंडर्स) को सप्लाई किया गया था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान इस अवैध विनिर्माण इकाई से भारी मात्रा में संदिग्ध रसायन, खाली कंटेनर और पैकेजिंग सामग्री जब्त की है।
इस बीच, स्थानीय नागरिकों का गुस्सा प्रशासन और पुलिस के खिलाफ फूट पड़ा है। फुगेवाड़ी के स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि आबकारी विभाग की नाक के नीचे सालों से यह अवैध धंधा चल रहा था। राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे पर घमासान शुरू हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के विधायक रोहित पवार ने हडपसर क्षेत्र में एक संदिग्ध शराब दुकान के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि पुलिस छोटे अपराधियों को पकड़कर मुख्य सरगनाओं को बचाने का प्रयास कर रही है। शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने भी राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे प्रशासनिक विफलता करार दिया है।
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नागरिकों के लिए चेतावनी और आगे के कदम
पुणे पुलिस और राज्य आबकारी विभाग ने संयुक्त बयान जारी कर नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत, बिना लेबल वाली या संदिग्ध रूप से सस्ते दामों पर बिकने वाली देसी शराब का सेवन न करें। पुलिस ने हडपसर, वानवड़ी, दापोडी और भोसरी जैसे संवेदनशील इलाकों में सघन तलाशी अभियान (Combing Operations) शुरू कर दिया है। आबकारी विभाग ने शहर के सभी लाइसेंसी और गैर-लाइसेंसी ठिकानों के स्टॉक वेरिफिकेशन के लिए विशेष टीमों का गठन किया है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि यदि किसी व्यक्ति को शराब पीने के बाद चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छाना या पेट में तेज दर्द जैसे लक्षण महसूस हों, तो उसे बिना समय गंवाए नजदीकी सरकारी अस्पताल लेकर जाएं।



