CG NEWS : दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल में इलाज के दौरान 20 वर्षीय युवती की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि युवती के शरीर में खून की भारी कमी थी और बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उसे समय पर ब्लड उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके कारण उसकी मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में आक्रोश और गम का माहौल देखने को मिला।
मृतका की पहचान मरोदा भिलाई निवासी दीपिका गाड़ा के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार दीपिका पिछले कई दिनों से बीमार थी। उसे हाथ-पैर, कमर और पूरे शरीर में दर्द की शिकायत थी। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर शनिवार रात करीब 11 बजे एम्बुलेंस के जरिए उसे दुर्ग जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर में खून की मात्रा काफी कम है और तत्काल ब्लड चढ़ाने की आवश्यकता है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की ओर से तीन यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने के लिए कहा गया। आर्थिक रूप से कमजोर होने और तत्काल डोनर नहीं मिलने के कारण परिवार ने अस्पताल प्रबंधन और ब्लड बैंक से कम से कम एक यूनिट रक्त उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि इलाज शुरू किया जा सके।
परिजनों का कहना है कि दीपिका की मां लगातार डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ से ब्लड की व्यवस्था करने की गुहार लगाती रही, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। आरोप है कि समय पर रक्त नहीं मिलने के कारण सोमवार शाम इलाज के दौरान दीपिका ने दम तोड़ दिया।
डॉक्टरों के अनुसार दीपिका सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित थी और उसका उपचार चल रहा था। उसका ब्लड ग्रुप ओ-पॉजिटिव था तथा हीमोग्लोबिन स्तर घटकर लगभग 5 ग्राम रह गया था। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि गंभीर स्थिति में अस्पताल के उपलब्ध स्टॉक से भी मरीज को प्रारंभिक तौर पर एक या दो यूनिट रक्त दिया जा सकता था।
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हालांकि जिला अस्पताल के सिविल सर्जन ने ब्लड की कमी के कारण मौत होने के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम गठित कर दी गई है।
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं बेटी की मौत के बाद परिजन सदमे में हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।



